Devdutt Padikkal Biography in Hindi: फर्श से अर्श तक की कहानी, नेट वर्थ और लव लाइफ


अगर आप क्रिकेट के सच्चे दीवाने हैं, तो आपने क्रीज पर खड़े उस लंबे-चौड़े लड़के को तो जरूर देखा होगा, जो बाएं हाथ से जब टाइमिंग के साथ शॉट लगाता है तो देखने वालों की आंखें टकटकी बांधे रह जाती हैं। आज हम बात कर रहे हैं देवदत्त पाडिकल की, जिनकी कहानी सिर्फ रनों की गिनती नहीं है, बल्कि अनगिनत रातों की खामोश मेहनत और कभी हार न मानने वाले एक जुनूनी इंसान का खूबसूरत सफर है।

​देवदत्त भारतीय क्रिकेट का वो जगमगाता सितारा हैं, जिन्होंने अपनी कलात्मक बल्लेबाजी और कमाल के अनुशासन से बहुत ही कम उम्र में हर क्रिकेट प्रेमी के दिल में एक खास जगह बना ली है।

केरल राज्य में जन्म, परिवार और हैदराबाद आने की कहानी

​देवदत्त पाडिकल का जन्म केरल राज्य के मलप्पुरम जिले के एडाप्पुल में 7 जुलाई 2000 को हुआ था। उनके पिता बाबू पाडिकल व्यावसायिक कारणों और अपनी प्राइवेट नौकरी के सिलसिले में काम करते थे। देवदत्त के जन्म के कुछ ही महीनों बाद उनके पिता का ट्रांसफर तेलंगाना (तब आंध्र प्रदेश) के हैदराबाद शहर में हो गया। इसी वजह से उनकी मां अंबिका पाडिकल और नन्हे देवदत्त को भी केरल छोड़कर हैदराबाद आना पड़ा। देवदत्त की एक बड़ी बहन भी हैं, जिनका नाम चांदनी पाडिकल है, जो बचपन से ही अपने भाई की हर छोटी-बड़ी खुशी में साथ रहीं।

11 साल की उम्र में बेंगलुरु का रुख और क्रिकेट का सपना

​हैदराबाद में बड़े होते हुए नन्हें देवदत्त के दिल में क्रिकेट का ऐसा जुनून जागा कि वो दिन-रात बस बल्ले के साथ ही दिखने लगे। जब देवदत्त 11 साल के हुए, तब उनके पिता ने महसूस किया कि अगर बेटे के इस हुनर को सही दिशा देनी है और पेशेवर क्रिकेटर बनाना है, तो बेंगलुरु जाना पड़ेगा, क्योंकि वहां कर्नाटक स्टेट क्रिकेट एसोसिएशन का ढांचा और कोचिंग सुविधाएं बहुत शानदार थीं। बस फिर क्या था, बेटे के इस एक सपने के लिए उनके माता-पिता ने एक बार फिर बड़ा फैसला लिया और पूरा परिवार हैदराबाद छोड़कर कर्नाटक के बेंगलुरु शहर में शिफ्ट हो गया।

बचपन का जुनून और एकेडमी का सफर


बेंगलुरु पहुंचते ही देवदत्त का दाखिला मशहूर कर्नाटक इंस्टीट्यूट ऑफ क्रिकेट (KIOC) में कराया गया। वहां की तपती धूप में इस लड़के ने कभी थकना नहीं सीखा। घंटों नेट प्रैक्टिस करना और अपनी गलतियों को सुधारना उनका रोज़ का नियम बन गया था। इसी लगन का नतीजा था कि उन्होंने देखते ही देखते कर्नाटक की अंडर-14 और अंडर-16 टीमों में अपनी जगह पक्की कर ली।

घरेलू क्रिकेट में रनों का पहाड़ और रणजी तक का सफर

​एकेडमी में दिन-रात बहाया गया पसीना रंग लाने लगा। एज-ग्रुप क्रिकेट में गेंदबाजों के पसीने छुड़ाने के बाद देवदत्त ने कर्नाटक की अंडर-19 टीम में कदम रखा। साल 2018-19 के सीजन में उन्हें कर्नाटक की सीनियर रणजी टीम में खेलने का मौका मिला। इसके बाद 2019-20 की विजय हजारे और सैयद मुश्ताक अली ट्रॉफी में तो उन्होंने ऐसा गदर मचाया कि पूरे देश में सबसे ज्यादा रन बनाने वाले बल्लेबाज बन गए। इस धमाकेदार खेल ने टीम इंडिया के चयनकर्ताओं का ध्यान सीधे अपनी ओर खींच लिया।

आईपीएल का जलवा 

​साल 2019 में जब Royal Challengers Bengaluru (RCB) ने देवदत्त को अपनी टीम में चुना, तो उनके करियर को एक नया आसमान मिल गया। साल 2020 में जब पहली बार आईपीएल में उतरने का मौका मिला, तो उन्होंने पहले ही सीजन में 473 रन ठोक कर 'इमरजिंग प्लेयर ऑफ द ईयर' का खिताब अपने नाम कर लिया 


इसके बाद वे राजस्थान रॉयल्स और लखनऊ सुपर जायंट्स का भी हिस्सा रहे और मैदान पर कई मैच जिताऊ पारियां खेलीं। आईपीएल में देवदत्त अब तक 90 मैचों की 90 पारियों में 2,270 रन बना चुके हैं, जिसमें उनका सर्वोच्च स्कोर 101 रन* रहा है। उनके नाम आईपीएल में 1 शानदार शतक और 14 अर्धशतक दर्ज हैं।

अंतरराष्ट्रीय करियर का आगाज (Test, T20I & ODI Stats)

​देवदत्त की यह अटूट तपस्या तब सफल हुई जब जुलाई 2021 में उन्हें श्रीलंका के खिलाफ भारत की नीली जर्सी पहनने और T20I डेब्यू करने का मौका मिला। इसके बाद मार्च 2024 में इंग्लैंड के खिलाफ धर्मशाला की हसीन वादियों में उन्होंने अपना टेस्ट डेब्यू किया और पहली ही पारी में 65 रनों की दिलकश फिफ्टी जड़कर सबको बता दिया कि वे बड़े मंच के खिलाड़ी हैं।

​हाल ही में श्रीलंका के खिलाफ गॉल टेस्ट मैच में तो देवदत्त ने कमाल ही कर दिया। उन्होंने श्रीलंकाई गेंदबाजों की बखिया उधेड़ते हुए 167 रनों की बेहद आक्रामक और यादगार पारी खेली। यह उनके टेस्ट करियर का पहला शतक था, जिसे उन्होंने एक मैराथन पारी में बदलकर अपनी काबिलियत का लोहा मनवाया।


टेस्ट क्रिकेट देवदत्त ने भारत के लिए अब तक 3 टेस्ट मैचों की 4 पारियों में 257 रन बनाए हैं। टेस्ट में उनका बेस्ट स्कोर 167 रन है और उनका बल्लेबाजी औसत 164.25 का है। उनके खाते में 1 शतक और 1 फिफ्टी है।

​टी20 अंतरराष्ट्रीय (T20I) भारत के लिए खेले 2 T20I मैचों में वे 38 रन बना चुके हैं, जिसमें उनका उच्चतम स्कोर 29 रन रहा है।

​वनडे (ODI) देवदत्त को अभी भारतीय वनडे टीम की ओर से डेब्यू करने का बेसब्री से इंतजार है।

नेट वर्थ (Net Worth)

​देवदत्त पाडिकल की कुल संपत्ति (Net Worth) आज के समय में लगभग 35 से 40 करोड़ रुपये के आसपास आंकी जाती है। उनकी कमाई का मुख्य जरिया बीसीसीआई (BCCI) की मैच फीस, आईपीएल की भारी-भरकम सैलरी और कई जाने-माने ब्रांड्स के विज्ञापन हैं।

लव लाइफ और पर्सनल लाइफ


फैंस अक्सर इस युवा खिलाड़ी की लव लाइफ के बारे में जानने के लिए उत्सुक रहते हैं, लेकिन देवदत्त अपनी निजी जिंदगी को बहुत प्राइवेट रखना पसंद करते हैं। फिलहाल उनका पूरा ध्यान सिर्फ और सिर्फ अपनी बल्लेबाजी, फिटनेस और भारतीय टीम में अपनी जगह को और मजबूत करने पर है। रिपोर्ट्स के मुताबिक वे अभी पूरी तरह से सिंगल हैं और क्रिकेट ही उनका पहला प्यार है।

देवदत्त पाडिकल की यह कहानी सिर्फ एक क्रिकेटर बनने का सफर नहीं है, बल्कि यह इस बात का सबूत है कि अगर आपके सपनों में दम हो और परिवार का साथ मिले, तो आप किसी भी मोड़ से अपनी किस्मत बदल सकते हैं।

आपकी क्या राय है

क्या देवदत्त पाडिकल की यह संघर्ष भरी और प्रेरणादायक कहानी आपको पसंद आई आपको उनके करियर की कौन सी बात सबसे ज्यादा प्रेरित करती है, हमें कमेंट्स में अपनी राय जरूर शेयर करें अगर आपको यह कहानी दिल से पसंद आई हो तो इसे अपने क्रिकेट लवर दोस्तों के साथ शेयर करना बिल्कुल न भूलें। क्रिकेट की ऐसी ही अनसुनी कहानियों, स्टार्स की बायोग्राफी और लेटेस्ट लाइव अपडेट्स के लिए हमारे साथ बने रहें


                           ... लेखक नेम शानू धोनी सर फैन बॉय... 

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