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Showing posts from August 18, 2026

IND vs SL 1st Test Day 4 ऋषभ पंत का तूफान और गेंदबाजों का कहर चौथे दिन ही बैकफुट पर श्रीलंका जीत से बस 6 विकेट दूर भारत

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गॉल के खूबसूरत मैदान पर चौथे दिन का खेल खत्म होते-होते भारतीय टीम ने मैच पर अपनी पकड़ बेहद मजबूत कर ली है। भारत ने श्रीलंका के सामने जीत के लिए 372 रनों का विशाल लक्ष्य रखा, जिसका पीछा करते हुए मेजबान टीम दिन का खेल खत्म होने तक 84 रनों पर ही अपने 4 बड़े विकेट गंवा चुकी है। श्रीलंका को अब भी जीत के लिए 288 रनों की दरकार है, जबकि भारतीय टीम इस पहले टेस्ट मैच को अपने नाम करने से महज 6 विकेट दूर है। ​दिन की शुरुआत में भारत की दूसरी पारी 193 रनों पर जाकर सिमटी। शुरुआत में झटका तब लगा जब यशस्वी जायसवाल बिना खाता खोले पवेलियन लौट गए। इसके बाद केएल राहुल (35 रन) और देवदत्त पडिक्कल (44 रन) ने मिलकर पारी को संभाला। फिर क्रीज पर उतरे ऋषभ पंत ने अपने बेफिक्र अंदाज में श्रीलंकाई गेंदबाजों की जमकर खबर ली। पंत ने सिर्फ 69 गेंदों में 8 चौके और 2 शानदार छक्के जड़कर 66 रनों की आतिशी पारी खेली। श्रीलंका की ओर से असिथा फर्नांडो ने 4 और प्रभात जयसूर्या ने 3 विकेट चटकाए। ​372 रनों के बड़े लक्ष्य का पीछा करने उतरी श्रीलंकाई टीम की शुरुआत बेहद खराब रही। तेज गेंदबाज मोहम्मद सिराज ने शुरुआत में ही निशान मदुश्क...

Rishabh Pant and Ravindra Jadeja Galle Test Record गॉल में पंत-जडेजा का महा-धमाका ध्वस्त किए बड़े रिकॉर्ड्स

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गॉल टेस्ट के चौथे दिन मैदान पर वो सब कुछ देखने को मिला जिसके लिए टेस्ट क्रिकेट पहचाना जाता है। भारतीय फैंस के लिए यह दिन किसी उत्सव से कम नहीं रहा। जब ऋषभ पंत और रवींद्र जडेजा क्रीज पर आए, तो श्रीलंकाई गेंदबाजों के पास उनकी आक्रामक और समझदारी भरी बल्लेबाजी का कोई जवाब नहीं था। ​ पंत की तूफानी पारी और वर्ल्ड रिकॉर्ड ​ऋषभ पंत जब भी लाल गेंद से खेलने उतरते हैं, तो मैच का रोमांच एक अलग ही लेवल पर चला जाता है। गॉल में भी उन्होंने यही किया। पंत ने महज 69 गेंदों पर 66 रनों की बेहद आतिशी पारी खेली। अपनी इस पारी में जैसे ही उन्होंने दूसरा छक्का लगाया, पूरा स्टेडियम तालियों से गूंज उठा। ​पंत अब गेंदों के मामले में टेस्ट क्रिकेट इतिहास में सबसे तेजी से 100 छक्के लगाने वाले दुनिया के पहले बल्लेबाज बन गए हैं। उन्होंने यह कारनामा सिर्फ 4,918 गेंदों में कर दिखाया और ऑस्ट्रेलिया के महान विकेटकीपर एडम गिलक्रिस्ट के बरसों पुराने रिकॉर्ड को पीछे छोड़ दिया। भारत की तरफ से टेस्ट में 100 छक्के जड़ने वाले वे पहले खिलाड़ी भी बन चुके हैं। ​ जडेजा का ऑलराउंडर अवतार ​दूसरी तरफ 'सर' रवींद्र जडेजा ने एक बा...

Devdutt Padikkal Biography in Hindi: फर्श से अर्श तक की कहानी, नेट वर्थ और लव लाइफ

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अगर आप क्रिकेट के सच्चे दीवाने हैं, तो आपने क्रीज पर खड़े उस लंबे-चौड़े लड़के को तो जरूर देखा होगा, जो बाएं हाथ से जब टाइमिंग के साथ शॉट लगाता है तो देखने वालों की आंखें टकटकी बांधे रह जाती हैं। आज हम बात कर रहे हैं देवदत्त पाडिकल की, जिनकी कहानी सिर्फ रनों की गिनती नहीं है, बल्कि अनगिनत रातों की खामोश मेहनत और कभी हार न मानने वाले एक जुनूनी इंसान का खूबसूरत सफर है। ​देवदत्त भारतीय क्रिकेट का वो जगमगाता सितारा हैं, जिन्होंने अपनी कलात्मक बल्लेबाजी और कमाल के अनुशासन से बहुत ही कम उम्र में हर क्रिकेट प्रेमी के दिल में एक खास जगह बना ली है। ​ केरल राज्य में जन्म, परिवार और हैदराबाद आने की कहानी ​देवदत्त पाडिकल का जन्म केरल राज्य के मलप्पुरम जिले के एडाप्पुल में 7 जुलाई 2000 को हुआ था। उनके पिता बाबू पाडिकल व्यावसायिक कारणों और अपनी प्राइवेट नौकरी के सिलसिले में काम करते थे। देवदत्त के जन्म के कुछ ही महीनों बाद उनके पिता का ट्रांसफर तेलंगाना (तब आंध्र प्रदेश) के हैदराबाद शहर में हो गया। इसी वजह से उनकी मां अंबिका पाडिकल और नन्हे देवदत्त को भी केरल छोड़कर हैदराबाद आना पड़ा। देवदत्त की एक ब...

Cricketers Qualification क्या स्पोर्ट्स में कामयाबी और Success के लिए पढ़ाई ज़रूरी है जानिए रिपोर्ट कार्ड बनाम जुनून का सच

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आज भी हमारे देश में जैसे ही रिजल्ट का दिन आता है, हर दूसरे घर में एक ही घिसा-पिटा डायलॉग सुनने को मिलता है पढ़ोगे-लिखोगे तो बनोगे नवाब खेलोगे-कूदोगे तो होगे खराब। ​लेकिन कभी आपने ठंडे दिमाग से बैठकर सोचा है कि क्या आज के दौर में यह बात 1% भी सच है जवाब है बिल्कुल नहीं  ​आज स्पोर्ट्स की दुनिया ने इस पुरानी सोच की धज्जियां उड़ा दी हैं। मैदान में दिन-रात पसीना बहाकर इतिहास रचने वाले खिलाड़ियों ने पूरी दुनिया को यह समझा दिया है कि आपकी Success कागज़ की एक मार्कशीट तय नहीं करती, बल्कि आपके अंदर का जुनून तय करता है। ​ क्रिकेट के मैदान पर मार्कशीट नहीं बिकती जब कोई युवा खिलाड़ी हाथ में बल्ला या गेंद लेकर मैदान में उतरता है, तो कोई कोच या सिलेक्टर उससे यह नहीं पूछता कि उसके 10वीं या 12वीं में कितने परसेंट आए थे। ​मैदान में सिर्फ और सिर्फ आपका हुनर, आपकी टाइमिंग और आपकी मेहनत देखी जाती है। ​ सचिन तेंदुलकर और क्रिकेट का जुनून उदाहरण के लिए सचिन तेंदुलकर को ही देख लीजिए। बहुत कम उम्र में ही सचिन ने पढ़ाई-लिखाई की जगह क्रिकेट के मैदान को चुना। जिस उम्र में बच्चे किताबों में नंबर ढूंढते हैं, उस...