Ajinkya Rahane Biography डोंबिवली की लोकल ट्रेन से गाबा के किले तक का वो सफर जिसने आज टीम इंडिया को हमेशा के लिए कह दिया अलविदा


क्रिकेट की चकाचौंध में अक्सर उन खिलाड़ियों का शोर ज्यादा होता है जो मैदान पर आक्रामक होते हैं, लेकिन भारतीय क्रिकेट इतिहास में एक लड़का ऐसा भी आया जिसने अपनी खामोशी से वो इतिहास लिखा जिसे बड़े-बड़े दिग्गज नहीं लिख पाए। हम बात कर रहे हैं अजिंक्य रहाणे की, जिन्होंने आज यानी 30 जुलाई 2026 को भारतीय क्रिकेट से हमेशा-हमेशा के लिए संन्यास ले लिया है। उनके संन्यास के साथ ही उस दौर का अंत हो गया है जब टीम संकट में होती थी तो देश को इस खिलाड़ी पर सबसे ज्यादा भरोसा होता था। 

​अजिंक्य रहाणे की पूरी लाइफ स्टोरी किसी को भी भावुक कर सकती है। महाराष्ट्र के अहमदनगर जिले के एक बेहद छोटे से गाँव चन्दनपुरी में 6 जून 1988 को एक साधारण मिडिल क्लास परिवार में उनका जन्म हुआ था। बाद में उनका परिवार मुंबई के डोंबिवली में शिफ्ट हो गया। रहाणे के पिता मधुकर रहाणे और माँ सुजाता रहाणे के पास इतने पैसे नहीं थे कि वो अपने बेटे को महंगी गाड़ियों में भेज सकें। 

डोंबिवली की खचाखच भरी लोकल ट्रेनों में, भारी-भरकम क्रिकेट किट बैग लादकर, लोगों के धक्के खाते हुए मुंबई के आजाद मैदान पहुंचना रहाणे की रोज़ की कहानी थी। इसी कड़े और कड़वे संघर्ष ने उन्हें मैदान पर चट्टान की तरह डटना सिखाया।

​टेस्ट क्रिकेट के असली 'द वॉल 2.0 और उनके बेमिसाल रिकॉर्ड्स


रहाणे का असली क्लास हमेशा टेस्ट क्रिकेट में देखने को मिला। जब-जब टीम इंडिया के बड़े-बड़े धुरंधर विदेशों की तेज और उछाल भरी पिचों पर सरेंडर कर देते थे, रहाणे वहाँ दीवार बनकर खड़े हो जाते थे। उन्होंने भारत के लिए कुल 85 टेस्ट मैच खेले, जिसकी 144 पारियों में उनके बल्ले से 5,077 रन निकले। टेस्ट में रहाणे ने 12 शानदार शतक और 26 अर्धशतक जड़े, जिसमें उनका सबसे बड़ा स्कोर 188 रन रहा। लॉर्ड्स की हरी घास पर उनका शतक हो या मेलबर्न में ऑस्ट्रेलिया के गेंदबाजों की बखिया उधेड़ना, रहाणे ने हमेशा मुश्किल पिचों पर रन बनाए। सिर्फ बल्लेबाजी ही नहीं, स्लिप में फील्डिंग करते हुए उन्होंने 102 कैच लपके, जो भारतीय क्रिकेट में एक मिसाल है।

​वनडे और टी20 इंटरनेशनल में देश के लिए समर्पण

​कई लोग भूल जाते हैं कि वनडे क्रिकेट में भी रहाणे ने टीम की रीढ़ की हड्डी का काम किया था। उन्होंने भारत के लिए 90 वनडे मैच खेले और 87 पारियों में 2,962 रन बनाए। वनडे में उनके नाम 3 खूबसूरत शतक और 24 अर्धशतक दर्ज हैं। टीम मैनेजमेंट ने उन्हें जब ओपनिंग करने को कहा, वो ओपनिंग पर गए, जब मिडिल ऑर्डर में जरूरत हुई, वो वहां खड़े रहे। वहीं, फटाफट क्रिकेट यानी टी20 इंटरनेशनल की बात करें तो उन्होंने 20 मैचों में 375 रन बनाए, जिसमें एक अर्धशतक शामिल रहा। आईपीएल में भी उन्होंने चेन्नई और राजस्थान जैसी टीमों के लिए कई मैच जिताऊ पारियां खेलीं।

​एडिलेड के 36 रन के मलबे से खड़ा किया था 'गाबा का किला 

​रहाणे की पूरी बायोग्राफी का सबसे सुनहरा पन्ना साल 2020-21 की बॉर्डर-गावस्कर ट्रॉफी है। एडिलेड टेस्ट में जब भारतीय टीम सिर्फ 36 रन पर ऑलआउट हो गई और विराट कोहली वापस भारत लौट आए, तब किसी को उम्मीद नहीं थी कि टीम इंडिया वापसी करेगी। लेकिन इस डोंबिवली के लड़के ने कप्तानी संभाली, चेहरे पर बिना किसी शिकन के मेलबर्न में कप्तानी शतक जड़ा और फिर गाबा में ऑस्ट्रेलिया का 32 साल पुराना घमंड तोड़कर तिरंगा लहराया।

आज जब यह चैंपियन खिलाड़ी चुपचाप बिना किसी शोर के रिटायरमेंट ले चुका है, तो हर खेल प्रेमी के दिल में बस एक ही कसक बची है—क्या देश को ऑस्ट्रेलिया में इतनी ऐतिहासिक जीत दिलाने वाले इस नायक को सम्मान के साथ विदा होने के लिए एक आखिरी फेयरवेल मैच नहीं मिलना चाहिए था 

​क्रिकेट के मैदान पर आपके वो खूबसूरत शॉट्स और वो सादगी हमेशा याद आएगी। शुक्रिया अजिंक्य रहाणे, भारतीय क्रिकेट को वो आत्मसम्मान देने के लिए जो कभी भुलाया नहीं जा सकता आपकी क्या राय है प्लीज नीचे कमेंट बॉक्स में कमेंट करके हमें ज़रूर बताएं अगर पोस्ट अच्छी लगी हो तो दोस्तों के साथ शेयर करें

                            ... लेखक नेम शानू धोनी सर फैन बॉय... 

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