BGMI & Free Fire से कमाई का पूरा गणित: जानिए इंडिया में एक प्रोफेशनल ई-स्पोर्ट्स प्लेयर बनने का असली रास्ता
मोबाइल हाथ में लेकर कमरे के किसी कोने में बैठे जिस लड़के को लोग सिर्फ "टाइमपास" करता हुआ समझते हैं, आज की तारीख में वो लाखों रुपये कमाने वाला ई-स्पोर्ट्स स्टार हो सकता है। आज के समय में गेमिंग सिर्फ दिल बहलाने का जरिया नहीं रह गई है, बल्कि यह एक ऐसा तगड़ा फील्ड बन चुका है जहां 18 से 22 साल के युवा अपने दम पर अपना नाम और करियर दोनों बना रहे हैं।
अगर आप भी इस फील्ड में आगे बढ़ना चाहते हैं, तो इसके हर एक पहलू को सीधे शब्दों में समझना बहुत जरूरी है।
नॉर्मल गेम खेलने और ई-स्पोर्ट्स में क्या फर्क है?
बहुत से लोग सोचते हैं कि दिन भर मोबाइल पर गेम खेलना ही ई-स्पोर्ट्स है, लेकिन ऐसा बिल्कुल नहीं है। इसे आप ऐसे समझ सकते हैं— जैसे गली-मोहल्ले में प्लास्टिक की गेंद से बैटिंग करने और इंटरनेशनल स्टेडियम में देश की जर्सी पहनकर खेलने में जमीन-आसमान का फर्क होता है, ठीक वैसा ही अंतर एक आम मोबाइल गेमर और एक प्रोफेशनल ई-स्पोर्ट्स प्लेयर में होता है।
ई-स्पोर्ट्स का मतलब है बाकायदा ऑफिशियल टूर्नामेंट्स, जहां देश की टॉप टीमें आपस में भिड़ती हैं। इन टीमों के अपने बूटकैंप्स (ट्रेनिंग सेंटर), मैनेजर और प्रोफेशनल कोच होते हैं। जब BGMI, Free Fire या Valorant जैसे बड़े गेम्स के मुकाबले लाइव होते हैं, तो उन्हें देखने के लिए लाखों लोग लाइव जुड़ते हैं। इसका रोमांच किसी भी बड़े खेल से कम नहीं होता।
मोटी प्राइज मनी और स्टार्स का जलवा
इन बड़े टूर्नामेंट्स की इनामी राशि (Prize Money) इतनी ज्यादा होती है कि एक बड़ी ट्रॉफी जीतते ही पूरी की पूरी टीम रातों-रात अपनी किस्मत बदल लेती है।
इतना ही नहीं, भारत में Team Soul, GodLike, या Global Esports जैसी बड़ी टीमों के जो स्टार प्लेयर्स हैं, उनकी फैन फॉलोइंग किसी बड़े सेलिब्रिटी या क्रिकेटर से कम नहीं है। जब ये खिलाड़ी लाइव आते हैं या किसी मैच के आखिरी सर्कल में हारी हुई बाजी को 'चिकन डिनर' या 'बूयाह' में बदलते हैं, तो फैंस इनके नाम के दीवाने हो जाते हैं।
पैसे कमाने के अलग-अलग रास्ते
इस फील्ड का सबसे बड़ा फायदा यह है कि यहां पैसे कमाने के लिए सिर्फ आपका एक धाकड़ प्लेयर होना ही जरूरी नहीं है। अगर आपके पास गेमिंग की अच्छी समझ है, तो आप इन अलग-अलग तरीकों से भी कमाई कर सकते हैं:
सैलरी पर खेलने वाले प्लेयर्स: बड़ी-बड़ी ई-स्पोर्ट्स कंपनियाँ बेहतरीन गेमर्स को हर महीने एक तय मोटी सैलरी पर अपने साथ रखती हैं।
कंटेंट क्रिएटर और स्ट्रीमर: यूट्यूब या दूसरे प्लेटफॉर्म्स पर अपना मजेदार गेमप्ले, फनी कमेंट्री या गेम की टिप्स-ट्रिक्स दिखाकर लोग ब्रांड्स से अच्छी स्पॉन्सरशिप और डोनेशन हासिल करते हैं।
कास्टर्स और एनालिस्ट: जैसे क्रिकेट में कमेंट्री के बिना मजा नहीं आता, वैसे ही इन गेमिंग मैचों में भी हिंदी में कमेंट्री करने वाले (कास्टर्स) की भारी डिमांड है, जो मैच का रोमांच बढ़ा देते हैं और इसके लिए अच्छी फीस लेते हैं।
ऑफिशियल खेल का दर्जा
अब तो ई-स्पोर्ट्स को एक ऑफिशियल खेल की तरह देखा जाने लगा है। एशियन गेम्स जैसे बड़े इंटरनेशनल मंचों पर भी ई-स्पोर्ट्स को शामिल किया जा चुका है, जहां खिलाड़ी देश के लिए मेडल जीतने के इरादे से उतरते हैं। बेहतर इंटरनेट और अच्छे स्मार्टफोन्स की वजह से अब इस फील्ड का दायरा लगातार बढ़ता जा रहा है।
अगर किसी के अंदर गेमिंग का असली हुनर है, वो अपनी स्किल्स पर लगातार मेहनत करने को तैयार है और छोटे-मोटे लोकल टूर्नामेंट्स से शुरुआत करता है, तो वो भी इस फील्ड में अपनी एक मजबूत पहचान बना सकता है।
सभी BGMI और Free Fire लवर्स के लिए एक जरूरी सवाल 🎮🔥
आप सब की इस बारे में क्या राय है? क्या आप भी मोबाइल पर गेम खेलकर सिर्फ टाइमपास करना चाहते हैं, या फिर पूरी शिद्दत से मेहनत करके ई-स्पोर्ट्स (Esports) की दुनिया में एंट्री मारना चाहते हैं और गेमिंग को ही अपना करियर बनाकर अपनी लाइफ सेटल करना चाहते हैं?
मुझे कमेंट बॉक्स में जरूर लिखकर बताएं— क्या आप भी आने वाले समय में एक प्रोफेशनल ई-स्पोर्ट्स प्लेयर बनना चाहेंगे?
अगर आपको यह जानकारी थोड़ी सी भी अच्छी और काम की लगी हो, तो प्लीज इस पोस्ट पर कमेंट करें और इसे अपने सभी गेमर दोस्तों के साथ जमकर शेयर करें
... लेखक नेम शानू धोनी सर फैन बॉय...
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