IPL का अंधा पैसा vs रणजी ट्रॉफी का दर्द: क्या 2 महीने के इस तमाशे ने हमारे क्रिकेट को अंदर से खोखला कर दिया है?

 


पैसा, शोहरत, खचाखच भरे स्टेडियम, आसमान में गूंजती आतिशबाजी और हर चौके-छक्के पर झूमते लाखों फैंस—यही तो पहचान है आज के आईपीएल (IPL) की। दो महीनों का यह ऐसा त्योहार है, जो पूरे देश को टीवी स्क्रीन और मोबाइल से चिपकाए रखता है। आज आईपीएल सिर्फ एक खेल नहीं, बल्कि अरबों रुपये का एक ऐसा चमकता हुआ साम्राज्य बन चुका है जहाँ रातों-रात खिलाड़ियों की किस्मत बदल जाती है। लेकिन

जी हाँ, मैं बात कर रहा हूँ रणजी ट्रॉफी की। वो टूर्नामेंट जिसे हम भारतीय क्रिकेट की 'रीढ़ की हड्डी' कहते हैं, आज वो खुद स्ट्रेचर पर लेटी हुई है। एक तरफ वो लड़के हैं जो 2 महीने बल्ला घुमाकर इतने करोड़ कमा लेते हैं कि उनकी सात पीढ़ियां बैठ कर खाएं, और दूसरी तरफ वो खिलाड़ी हैं जो दिसंबर की कड़कड़ाती ठंड में, बिना किसी दर्शकों के, फटी हुई उंगलियों से लाल गेंद को चमका रहे होते हैं—सिर्फ एक अदद पहचान के लिए।

IPL का वो अंधा पैसा, जो सिर चढ़कर बोल रहा है

अब आईपीएल के पैसे की क्या ही बात करें? यहाँ तो पैसों की ऐसी बारिश होती है कि अच्छे-अच्छों की आंखें फटी की फटी रह जाएं। ऑक्शन के दिन जब बोलियां लगती हैं, तो लगता है खिलाड़ियों की नहीं, बल्कि किसी आलीशान बंगले की नीलामी हो रही है।

चलो, अपने देश के लड़कों को तो छोड़ो, यहाँ तो विदेशी खिलाड़ियों पर ऐसा 'अंधा पैसा' लुटाया जाता है कि देखकर माथा चकरा जाए। अभी इसी 2026 के ऑक्शन की ही बात ले लो। मैं खुद चेन्नई सुपर किंग्स (CSK) का बहुत बड़ा फैन हूँ, और जब ऑक्शन टेबल पर कैमरन ग्रीन का नाम आया, तो भाई साहब, सीएसके और केकेआर (KKR) के बीच जो कांटे की टक्कर हुई है, उसने सबकी सांसें रोक दी थीं। दोनों टीमें अड़ गई थीं कि ग्रीन को तो लेकर ही रहेंगे। पैडल पर पैडल उठ रहे थे और रकम रॉकेट की तरह ऊपर जा रही थी। आखिरी में दिल तो तब टूटा जब सीएसके पीछे हट गई और केकेआर ने कैमरन ग्रीन को 25 करोड़ और कुछ लाख रुपये की ऐतिहासिक कीमत पर खरीद लिया!

अब खुद सोचो भाई, 25 करोड़ से ज्यादा की रकम! वो खिलाड़ी सिर्फ 14 मैच खेलने के इतने पैसे ले जाएगा। मतलब जो विदेशी खिलाड़ी अपने देश में साल भर घिसकर भी उतना नहीं कमा पाते, वो भारत आते हैं, 2 महीने मौज काटते हैं, आईपीएल के मालिकों की जेब खाली करते हैं और सूटकेस भरकर डॉलर अपने देश ले जाते हैं।

मैं IPL का दुश्मन नहीं हूँ, क्योंकि बदलाव तो दिख रहा है!

देखो भाई, साफ बात बोलूं तो मैं यहाँ आईपीएल की कोई बुराई या उसका अपमान नहीं कर रहा हूँ। आईपीएल अपनी जगह एकदम कड़क चीज़ है। इंडियन प्रीमियर लीग दुनिया की सबसे बेहतरीन और नंबर-वन लीग है, इसमें कोई शक नहीं है। आईपीएल ने हमारे कई गरीब पिताओं के बेटों को करोड़पति बनाया है और उन्हें वो मुकाम दिया है जिसके वो हकदार थे।

पहले का ज़माना अलग था, जब युवाओं को जल्दी मौका नहीं मिलता था। लेकिन अब, खासकर इस 2026 के सीजन में बहुत बड़ा चेंज ओवर (बदलाव) देखने को मिला है। बहुत सी फ्रेंचाइजीज़ ने इस बार सीधे डोमेस्टिक (घरेलू) क्रिकेट से हमारे युवा टैलेंट को उठाया है। अपनी सीएसके को ही देख लो, उन्होंने खुद दो ज़बरदस्त डोमेस्टिक प्लेयर्स—प्रशांत वीर और कार्तिक शर्मा को 14-14 लाख रुपये के आसपास की रकम पर अपनी टीम में शामिल किया है। सिर्फ सीएसके ही नहीं, बल्कि लगभग हर फ्रेंचाइजी ने इस बार अपने युवा स्टार्स पर जमकर भरोसा दिखाया है और पैसा खर्च किया है, जो कि बहुत कमाल की बात है।

मैं बिल्कुल नहीं चाहता कि आईपीएल बंद हो जाए। आईपीएल तो चलते रहना चाहिए, क्योंकि वो हमारा गौरव है। लेकिन मेरा पॉइंट सिर्फ इतना है कि यार, जब आईपीएल में ये बदलाव आ सकता है, तो रणजी ट्रॉफी की मेंटेनेंस और कंडीशन को सुधारने के लिए थोड़ा सपोर्ट क्यों नहीं मिल सकता?

आखिर में, ये जितने भी प्रशांत वीर या कार्तिक शर्मा जैसे नए युवा स्टार्स आईपीएल में चमकने आ रहे हैं, ये सब रणजी ट्रॉफी खेलकर ही तो अपनी पहचान बना रहे हैं!

बस 50% सपोर्ट दे दो, फिर देखो रणजी का जलवा!

मेरा कहने का मतलब यह कतई नहीं है कि आप आईपीएल मत देखो। आईपीएल मजे से देखो भाई! लेकिन सोचो, जितना क्रेज, जितना पैसा और जितना सपोर्ट आईपीएल को मिलता है... उसका उतना नहीं, बल्कि अगर उसका सिर्फ 50% सपोर्ट भी हमारी रणजी ट्रॉफी को मिल जाए ना, तो आज रणजी का पूरा नक्शा बदल जाएगा।

अगर वहां के खिलाड़ियों को बेहतर सुविधाएं, अच्छी मेंटेनेंस और थोड़ा और अच्छा पैसा मिलने लगे, तो वहां खेल रहे लड़के भी अंदर से मोटिवेट होंगे। उन्हें लगेगा कि हाँ भाई, देश के लिए लाल गेंद से खेलना भी उतना ही सम्मानजनक है। और जब खिलाड़ियों में वो मोटिवेशन दिखेगा, तो मैच और रोमांचक होंगे। यकीन मानिए, जिस एक्साइटमेंट (उत्साह) के साथ आज पूरा देश टीवी के सामने बैठकर आईपीएल देखता है, उसी एक्साइटमेंट के साथ लोग रणजी ट्रॉफी के मैच भी देखना शुरू कर देंगे। जब नर्सरी को थोड़ा पानी और खाद मिलेगी, तभी तो सुंदर पौधे उगेंगे!

और इधर रणजी ट्रॉफी का वो कड़वा दर्द

अब थोड़ा सा कैमरा घुमाइए और चलिए किसी छोटे शहर के मैदान पर, जहाँ रणजी का मैच चल रहा हो। स्टेडियम खाली पड़ा है, एकाध कुत्ता जरूर बाउंड्री लाइन के पास सोया हुआ दिख जाएगा। यह है हमारे फर्स्ट-क्लास क्रिकेट की हकीकत।

यहाँ एक सीनियर खिलाड़ी, जो पूरे पांच दिन मैदान पर जान लगाता है, उसे पूरे सीजन के (लगभग 10 मैच) मुश्किल से 24-25 लाख रुपये मिलते हैं। मतलब जितने में आईपीएल का कोई विदेशी खिलाड़ी एक ओवर फेंकता है या दो छक्के मारता है, उतना कमाने में हमारे घरेलू खिलाड़ियों की पूरी जवानी निकल जाती है! जो बेचारे बेंच पर बैठे रह गए, उनके हाथ तो सिर्फ कुछ हजार ही आते हैं।

सोच कर देखिए, आईपीएल का एक खिलाड़ी सिर्फ 2 महीने में उतना कमा लेता है, जितना एक रणजी का दिग्गज खिलाड़ी अपने पूरे 15 साल के करियर में नहीं कमा पाता। होटल भी वैसे नहीं मिलते, सफर भी आम फ्लाइट्स या ट्रेनों से होता है। पर सबसे ज्यादा क्या चुभता है पता है? उपेक्षा! आप रणजी में तिहरा शतक ठोक दो, अखबार के किसी कोने में छोटी सी खबर छपेगी। लेकिन आईपीएल में कोई एक हाथ से छक्का मार दे, तो हफ़्तों तक सोशल मीडिया पर उसका भौकाल रहता है।

जब खिलाड़ियों को लगने लगा कि 'घरेलू क्रिकेट मेरे लेवल का नहीं'

ये बात तब और बिगड़ी जब ईशान किशन और श्रेयस अय्यर जैसे बड़े नाम रणजी ट्रॉफी खेलने से कतराने लगे। बीसीसीआई चिल्लाता रहा कि भाई जाओ, जाकर अपनी स्टेट टीम के लिए खेलो। लेकिन नहीं, इन्हें तो आईपीएल की तैयारी करनी थी, जिम में पसीना बहाना था।

गनीमत कहो कि बोर्ड को गुस्सा आ गया और उन्होंने इन दोनों को सेंट्रल कॉन्ट्रैक्ट से बाहर का रास्ता दिखा दिया। इस एक वाकिए ने पूरे देश के सामने यह कड़वा सच लाकर रख दिया कि आज के दौर में कुछ खिलाड़ियों के लिए 'आईपीएल का पैसा' देश की इज्जत और घरेलू क्रिकेट के गौरव से बड़ा हो चुका है। जब तक डंडा नहीं चलेगा, तब तक कोई लाल गेंद को हाथ लगाने को तैयार नहीं है।

क्या हम टेस्ट क्रिकेट को खुद अपने हाथों से मार रहे हैं?

बीसीसीआई अब जाकर जागी है। मैच फीस बढ़ाने की बातें हो रही हैं, इंसेंटिव दिए जा रहे हैं। लेकिन भाई, बात सिर्फ पैसे की नहीं है, बात नीयत की है। आज का बच्चा जसप्रीत बुमराह या विराट कोहली जैसा 'लीडिंग लीजेंड' नहीं बनना चाहता, वो बनना चाहता है आईपीएल का स्टार।

लेकिन कोई इन युवाओं को समझाए कि अगर टेस्ट क्रिकेट और रणजी ट्रॉफी की ये तपस्या खत्म हो गई, तो भारतीय क्रिकेट की जड़ें सूख जाएंगी। टी-20 में फ्लिक मारकर छक्का लगाना आसान है, लेकिन जब इंग्लैंड या ऑस्ट्रेलिया की उछाल भरी पिचों पर जेम्स एंडरसन या पैट कमिंस की 145 की रफ्तार वाली लाल गेंद अंदर आएगी ना, तो ये आईपीएल के सारे रंग उड़ जाएंगे। वहां सिर्फ वही टिक पाता है जिसने रणजी की भट्टी में खुद को तपाया हो।

चलते-चलते: बस इतनी सी बात है...

आईपीएल महान है, वो अपनी जगह एकदम सही है। लेकिन मनोरंजन और विदेशी खिलाड़ियों पर 25-25 करोड़ रुपये पानी की तरह बहाने के चक्कर में अपनी बुनियाद यानी रणजी ट्रॉफी को मत भूलो भाई। अगर ये रणजी ट्रॉफी खत्म हो गई, तो यकीन मानिए, टीम इंडिया को ढहने में ज्यादा वक्त नहीं लगेगा। हमें आईपीएल का तमाशा भी चाहिए, लेकिन रणजी ट्रॉफी की इज्जत और तकनीक की कीमत पर बिल्कुल नहीं।

आपको क्या लगता है? क्या आईपीएल के साथ-साथ रणजी ट्रॉफी को भी 50% सपोर्ट मिलना चाहिए ताकि हमारे घरेलू स्टार्स भी मोटिवेट हो सकें? आपकी क्या राय है? प्लीज नीचे कमेंट बॉक्स में कमेंट करके हमें ज़रूर बताएं। अगर पोस्ट अच्छी लगी हो, तो दोस्तों के साथ शेयर करें!


                      ... लेखक नेम शानू धोनी सर फैन बॉय... 

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