ODI Cricket Future क्या सच में खत्म होने वाला है 50 Over का मैच जानिए क्यों T20 Leagues के आगे वेंटिलेटर पर है वनडे क्रिकेट
एक ज़माना था जब वनडे क्रिकेट का मतलब होता था पूरे दिन का असली रोमांच। सुबह टॉस से लेकर रात की आखिरी गेंद तक, टीवी के सामने से कोई हटता नहीं था। 1983 में कपिल देव का वर्ल्ड कप उठाना हो या 2011 में धोनी का वो ऐतिहासिक छक्का, हमारे बचपन की सबसे खूबसूरत यादें इसी 50 ओवर के खेल से जुड़ी हैं।
लेकिन आज का सच बहुत कड़वा है। आईपीएल (IPL) और दुनिया भर की चमचमाती टी20 लीग्स के इस दौर में, ऐसा लग रहा है जैसे वनडे क्रिकेट अपनी आखिरी सांसें गिन रहा है। यह सिर्फ फैन्स का डर नहीं है, बल्कि दुनिया भर के बड़े-बड़े क्रिकेटर्स की वो चिंता है जो अब खुलकर सामने आ रही है।
आइए बिना किसी घुमाव-फिराव के सीधे शब्दों में समझते हैं कि आखिर क्यों 50 ओवर का यह फॉर्मेट दम तोड़ता दिख रहा है।
1. 8 घंटे का मैच देखने का टाइम किसके पास है
आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में किसी के पास 8 घंटे टीवी के सामने चिपके रहने का वक्त नहीं है। टी20 मैच 3 घंटे में शुरू होकर खत्म भी हो जाता है—बिल्कुल एक एंटरटेनिंग फिल्म की तरह। वहीं, वनडे मैच में 15 से 40 ओवर के बीच का खेल इतना सुस्त हो जाता है कि लोग बोर होकर चैनल बदल देते हैं। जब 3 घंटे में पूरा थ्रिल मिल रहा हो, तो कोई पूरा दिन क्यों खराब करे
2. बड़े खिलाड़ियों की खुली चेतावनी
जब इंग्लैंड के स्टार ऑलराउंडर बेन स्टोक्स ने यह कहकर वनडे से संन्यास लिया था कि तीनों फॉर्मेट खेलना अब खिलाड़ियों के बस का नहीं है, तो पूरी दुनिया हैरान रह गई थी। महान गेंदबाज वसीम अकरम ने तो साफ कह दिया कि वनडे क्रिकेट को अब पूरी तरह बंद कर देना चाहिए क्योंकि यह खिलाड़ियों को बुरी तरह थका रहा है। रवि शास्त्री भी मान चुके हैं कि वनडे मैच अब धीरे-धीरे अपनी चमक खो रहे हैं। जब खेलने वाले स्टार खिलाड़ी ही इसमें दिलचस्पी नहीं दिखाएंगे, तो जनता क्यों देखेगी?
3. T20 लीग्स का अंधा पैसा और पावर
पूरी दुनिया में टी20 लीग्स का जाल बिछ चुका है। आईपीएल जैसी लीग्स में खिलाड़ियों को महीने भर खेलने के करोड़ों रुपये मिल रहे हैं। ऐसे में खिलाड़ी अपने देश के लिए बोरिंग वनडे सीरीज खेलने के बजाय इन लीग्स को चुन रहे हैं। न्यूजीलैंड के ट्रेंट बोल्ट और इंग्लैंड के जेसन रॉय जैसे बड़े नामों का नेशनल कॉन्ट्रैक्ट छोड़ना इस बात का जीता-जागता सबूत है।
4. बीच के ओवर्स का बोरिंग खेल
वनडे क्रिकेट की सबसे बड़ी कमजोरी है इसके बीच के ओवर (11 से 40 ओवर)। पावरप्ले खत्म होने के बाद टीमें सिर्फ सिंगल्स-डबल्स लेकर स्कोर आगे बढ़ाती हैं। न तो इसमें टी20 जैसी ताबड़तोड़ बाउंड्रीज देखने को मिलती हैं और न ही टेस्ट क्रिकेट जैसी लाजवाब जंग। यह शांत माहौल आज के युवाओं को बिल्कुल पसंद नहीं आता।
तो क्या वाकई बंद हो जाएगा वनडे क्रिकेट
पूरी तरह खत्म होना तो मुश्किल है, क्योंकि वनडे वर्ल्ड कप आज भी क्रिकेट का सबसे बड़ा और सबसे प्रतिष्ठित खिताब है। कोई भी खिलाड़ी टी20 वर्ल्ड कप जीतने से ज्यादा वनडे वर्ल्ड कप की ट्रॉफी उठाने का सपना देखता है।
लेकिन हां, दो देशों के बीच होने वाली आम वनडे सीरीजों का भविष्य बहुत धुंधला है।
आने वाले समय में हो सकता है कि हमें सिर्फ वर्ल्ड कप या चैंपियंस ट्रॉफी के वक्त ही 50 ओवर के मैच देखने को मिलें।
सीधी बात यह है: वनडे क्रिकेट को अगर जिंदा रखना है, तो इसमें कुछ बड़े और नए बदलाव करने होंगे। वरना वो दिन दूर नहीं जब 50 ओवर का यह फॉर्मेट सिर्फ इतिहास की किताबों और रिकॉर्ड्स में ही सिमट कर रह जाएगा।
हम सब जानते हैं कि 2027 का वनडे वर्ल्ड कप आने वाला है और पूरी दुनिया के क्रिकेट फैन्स अभी से इसका बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं। जब वर्ल्ड कप जैसा बड़ा टूर्नामेंट आता है, तो उसकी दीवानगी के आगे टी20 लीग्स भी फीकी पड़ जाती हैं। असली इतिहास तो इसी 50 ओवर के खेल में बनता है।
लेकिन हाँ, 2027 के वर्ल्ड कप के बाद इस फॉर्मेट के सामने बहुत बड़ी चुनौती होगी। अगर आईसीसी ने दो देशों के बीच होने वाली आम सीरीज (Bilateral Series) को बचाने के लिए कुछ नए और मजेदार नियम नहीं बनाए, तो वह दिन दूर नहीं जब यह फॉर्मेट सिर्फ इतिहास के पन्नों और रिकॉर्ड बुक्स में ही सिमट कर रह जाएगा। सीधी बात यह है कि वनडे क्रिकेट अभी मरा नहीं है, लेकिन इसे जिंदा रखने के लिए अब बदलाव करने की सख्त जरूरत है।
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... लेखक नेम शानू धोनी सर फैन बॉय...
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