Ruturaj Gaikwad Biography in Hindi: एशियन गेम्स में 'गोल्ड' जिताने वाले और 'थाला' के सबसे भरोसेमंद सेनापति की वो अनसुनी कहानी, जो टीम इंडिया की राजनीति और अप-डाउन के चक्रव्यूह में फंस गया



क्रिकेट की दुनिया बाहर से जितनी चमक-धमक वाली
दिखती है, अंदर की हकीकत उतनी ही कड़वी होती है। जब बात चेन्नई सुपर किंग्स (CSK) की आती है, तो सबको महेंद्र सिंह धोनी यानी हमारे 'थाला' याद आते हैं। लेकिन आज हम इस लेख में ऋतुराज गायकवाड़ की बायोग्राफी को एक अलग नजरिए से देखेंगे। यह सिर्फ एक खिलाड़ी के रनों की कहानी नहीं है, बल्कि यह उस लड़के का सफर है जिसने भारत को अपनी कप्तानी में गोल्ड मेडल जिताया और डोमेस्टिक क्रिकेट में 1 ओवर में 7 छक्के मारने का वो करिश्मा कर दिखाया जो आज तक दुनिया का कोई बल्लेबाज नहीं कर पाया! लेकिन इसके बावजूद यह लड़का टीम इंडिया की अंदरूनी राजनीति और लगातार होने वाले अप-डाउन का शिकार होता रहा। चलिए जानते हैं पुणे के इस शांत लड़के की वो अनसुनी कहानी, जिसके सफर में कामयाबी के साथ-साथ उतार-चढ़ाव के कई कांटे रहे हैं।

फसर के घर में जन्म, पर खून में दौड़ रहा था क्रिकेट

ऋतुराज गायकवाड़ का जन्म 31 जनवरी 1997 को महाराष्ट्र के पुणे शहर में हुआ था। उनके घर का माहौल पूरी तरह पढ़ा-लिखा और सरकारी नौकरी वाला था। उनके पिता दशरथ गायकवाड़ डीआरडीओ (DRDO) में एक बड़े रक्षा अधिकारी थे और उनकी माता सविता गायकवाड़ एक स्कूल में प्रिंसिपल थीं। ऐसे परिवार में आमतौर पर बच्चों से उम्मीद की जाती है कि वो पढ़-लिखकर अफसर बनें, लेकिन ऋतुराज की किस्मत का फैसला तो ऊपर वाले ने क्रिकेट के मैदान पर लिख रखा था।

जब ऋतुराज सिर्फ 5 साल के थे, तभी से उनके हाथों में बल्ला आ गया था। बेटे का यह जुनून देखकर माता-पिता ने भी उनका साथ दिया और महज 11 साल की उम्र में उन्हें पुणे की वेंगसरकर क्रिकेट एकेडमी में डाल दिया। वहां ऋतुराज ने नेट्स पर अपनी बैटिंग को इतना तराशा कि साल 2016 में जब उन्होंने महाराष्ट्र की तरफ से अपना
पहला फर्स्ट क्लास मैच खेला तो देखने वाले देखते रह गए

जब टूटी उंगली पर धोनी ने किया था साइन सीएसके में आने की अनसुनी कहानी

ऋतुराज शुरू से ही धोनी को अपना सबसे बड़ा आदर्श मानते थे, लेकिन उन्हें यह नहीं पता था कि एक दिन खुद धोनी उनके मेंटॉर बन जाएंगे। आईपीएल में आने से पहले का एक बेहद भावुक किस्सा है। एक डोमेस्टिक मैच या प्रैक्टिस सेशन के दौरान ऋतुराज की उंगली में गंभीर चोट लग गई थी और फ्रैक्चर हो गया था। ऋतुराज दर्द में थे, लेकिन उसी दौरान धोनी वहां आए। ऋतुराज ने उस टूटी हुई उंगली पर बंधे प्लास्टर पर धोनी से ऑटोग्राफ मांगा। धोनी ने मुस्कुराते हुए उस फ्रैक्चर पर अपने साइन किए। उस एक ऑटोग्राफ ने ऋतुराज के हौसले को ऐसा बढ़ाया कि उन्होंने दर्द को भुलाकर रनों की बारिश कर दी। धोनी ने इस लड़के की फौलादी मानसिक मजबूती को तभी भांप लिया था और साल 2019 में सीएसके ने उन्हें अपनी टीम में शामिल कर लिया।

तीन बार लगातार जीरो पर आउट होने का वो काला दौर और धोनी का सहारा


साल 2019 में चेन्नई सुपर किंग्स ने ऋतुराज को सिर्फ उनके बेस प्राइस यानी 20 लाख रुपये में खरीदा था। शुरुआत में उन्हें मौका नहीं मिला, लेकिन साल 2020 के आईपीएल में जब वो पहली बार ओपनिंग करने उतरे, तो उनके करियर का सबसे मुश्किल दौर शुरू हुआ। ऋतुराज अपने शुरुआती 3 मैचों में लगातार शून्य पर आउट होकर पवेलियन लौट गए। सोशल मीडिया पर ट्रोलर्स ने उन्हें घेर लिया, हर तरफ बातें होने लगीं कि यह लड़का सीएसके के लेवल का नहीं है।

ऐसी मुश्किल घड़ी में जब बड़े-बड़े खिलाड़ी टूट जाते हैं, ऋतुराज के पीछे ढाल बनकर खड़े हुए खुद धोनी। धोनी ने ऋतुराज से कहा कि बाहर के शोर को भूल जाओ, तुम्हारी तकनीक में कोई कमी नहीं है, बस मैदान पर जाकर गेम को एन्जॉय करो। कप्तान का यह भरोसा ऐसा काम कर गया कि ऋतुराज ने अगले 3 मैचों में लगातार 3 बेहतरीन हाफ सेंचुरी ठोक दीं। इसके अगले ही साल यानी साल 2021 में ऋतुराज ने 635 रन बनाकर ऑरेंज कैप जीती और सीएसके को 4 थी बार  चैंपियन बनाने में सबसे बड़ा रोल निभाया। यहीं से वो धोनी के सबसे भरोसेमंद सेनापति बन गए।

1 ओवर में 7 छक्के और एशियन गेम्स में भारत को गोल्ड!

ऋतुराज गायकवाड़ के नाम कुछ ऐसे रिकॉर्ड हैं जिन्हें सुनकर बड़े-बड़े दिग्गज भी दांतों तले उंगली दबा लेते हैं 1  ओवर में 7 छक्के का वर्ल्ड रिकॉर्ड  साल 2022 की विजय हजारे ट्रॉफी में उत्तर प्रदेश के खिलाफ खेलते हुए ऋतुराज ने वो कर दिखाया जो क्रिकेट इतिहास में कभी नहीं हुआ था। उन्होंने एक ओवर में लगातार 7 छक्के (एक नो बॉल सहित) जड़कर कुल 43 रन कूट डाले और मैच में  220 रनों  की नाबाद ऐतिहासिक पारी खेली।


कप्तान बनकर देश को जिताया गोल्ड  साल 2023 के एशियन गेम्स में जब भारतीय युवा टीम को चीन भेजा गया, तो ऋतुराज गायकवाड़ को टीम का कप्तान बनाया गया। अपनी बेहतरीन कप्तानी के दम पर ऋतुराज ने भारत को गोल्ड मेडल जिताया और तिरंगे का मान पूरी दुनिया में बढ़ाया।

टीम इंडिया की राजनीति और करियर का वो रियल स्कोर कार्ड (एकदम ताजा आंकड़े)

इतने अविश्वसनीय रिकॉर्ड्स और टैलेंट के बावजूद ऋतुराज गायकवाड़ का इंटरनेशनल करियर किसी रोलरकोस्टर राइड जैसा रहा है। भारतीय क्रिकेट में अक्सर होने वाली पसंद-नापसंद और राजनीति का असर ऋतुराज के करियर पर भी साफ देखा गया है। उनके असली आंकड़े बयां करते हैं कि मौके न मिलने के बाद भी इस लड़के में कितना दम है:

टी-20 इंटरनेशनल का कमाल रिकॉर्ड  ऋतुराज ने भारत के लिए अब तक कुल 23 टी-20 इंटरनेशनल मैच खेले हैं, जिनकी 20 पारियों में उनके बल्ले से कुल 633 रन निकले हैं। इस छोटे फॉर्मेट में उनका औसत 39.56 का और स्ट्राइक रेट 143.54 का रहा है। उन्होंने टी-20 में 1 शानदार शतक और 4 अर्धशतक लगाए हैं, और उनका सबसे बड़ा स्कोर 123 रन नाबाद रहा है (जो उन्होंने ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ गुवाहाटी में कूटा था)। इतने कड़क रिकॉर्ड के बावजूद उन्हें टीम से अंदर-बाहर किया जाता रहता है।

वनडे का सफर और साउथ अफ्रीका के खिलाफ वो यादगार शतक  वनडे क्रिकेट की बात करें तो ऋतुराज को बहुत ही कम मौके मिले, लेकिन जब मिले तो उन्होंने अपनी क्लास दिखा दी। उन्होंने अब तक भारत के लिए कुल 9 वनडे मैच खेले हैं, जिसकी 8 पारियों में उन्होंने 28.50 की औसत से कुल  228 रन बनाए हैं। इसी सफर में उन्होंने साउथ अफ्रीका के खिलाफ खेलते हुए विराट कोहली के साथ मिलकर मैदान पर तहलका मचाया था और वनडे क्रिकेट का अपना 1 शानदार शतक जड़ा था, जिसमें उनका सबसे हाईएस्ट स्कोर 105 रन रहा है। उनके खाते में 1 अर्धशतक भी दर्ज है। लेकिन इस शतक के बाद भी सिलेक्टर्स की राजनीति की वजह से उन्हें लंबे समय तक वनडे टीम से दूर रखा गया।

टेस्ट क्रिकेट की अनदेख सबसे ज्यादा दर्द टेस्ट क्रिकेट को लेकर होता है। ऋतुराज को कई बार भारतीय टेस्ट टीम की मुख्य स्क्वाड में चुना तो गया, वेस्टइंडीज और साउथ अफ्रीका के दौरों पर टीम के साथ भेजा भी गया, लेकिन प्लेइंग इलेवन में खेलने का मौका कभी नहीं दिया गया। डोमेस्टिक क्रिकेट में रनों का पहाड़ खड़ा करने के बाद भी उन्हें आज तक अपनी पहली टेस्ट कैप (डेब्यू करने) का इंतजार है।

जब धोनी ने कांटों का ताज सौंपा और दुनिया ने माना लोहा

साल 2024 का आईपीएल शुरू होने से ठीक एक दिन पहले धोनी ने कप्तानी छोड़ने का फैसला किया और सीएसके की पूरी सल्तनत सौंप दी अपने इसी भरोसेमंद सेनापति ऋतुराज गायकवाड़ को। धोनी जैसे महान कप्तान के हटने के बाद टीम को संभालना किसी कांटों के ताज से कम नहीं था। करोड़ों फैंस की उम्मीदें और मीडिया का भारी दबाव उनके ऊपर था।

लेकिन ऋतुराज ने बिल्कुल अपने गुरु धोनी के अंदाज में, शांत रहकर और बिना किसी हड़बड़ाहट के टीम की कमान संभाली। मैदान पर उनके फैसलों और कूल व्यवहार ने साबित कर दिया कि भले ही टीम इंडिया में उनके टैलेंट के साथ राजनीति होती रही हो, लेकिन सीएसके का यह सेनापति लंबी रेस का घोड़ा है।

ऋतुराज गायकवाड़ की पर्सनल लाइफ


अगर ऋतुराज की निजी जिंदगी की बात करें, तो उन्होंने साल 2023 में अपनी पुरानी दोस्त और गर्लफ्रेंड उत्कर्षा पवार के साथ शादी की। सबसे दिलचस्प बात यह है कि उत्कर्षा खुद भी महाराष्ट्र की महिला टीम की तरफ से घरेलू क्रिकेट खेल चुकी हैं और एक बेहतरीन ऑलराउंडर रही हैं। यानी दोनों ही मियां-बीवी क्रिकेटर हैं और एक-दूसरे के खेल के दबाव को बहुत अच्छे से समझते हैं।

एक छोटे शहर से निकलकर, लगातार 3 बार जीरो पर आउट होने का दर्द सहकर, 1 ओवर में 7 छक्के का वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाकर, वनडे में साउथ अफ्रीका के परखच्चे उड़ाकर शतक मारने और टीम इंडिया में राजनीति का सामना करते हुए भी आज सीएसके जैसी बड़ी टीम का कप्तान बने रहना, ऋतुराज की फौलादी मानसिक मजबूती को दिखाता है।

आपको क्या लगता है, क्या ऋतुराज गायकवाड़ के साथ टीम इंडिया में सचमुच राजनीति होती है? क्या उन्हें टेस्ट टीम में मौका मिलना चाहिए? अपनी राय हमें कमेंट बॉक्स में जरूर बताएं  प्लीज अगर पोस्ट अच्छी लगी हो, तो दोस्तों के साथ शेयर करें!
 
                          ... लेखक नेम शानू धोनी सर फैन बॉय... 
                       

Comments

Popular posts from this blog

IPL इतिहास का सबसे बड़ा भूचाल: रो पड़े थाला धोनी! 18 साल की 'अमर जोड़ी' का हुआ दर्दनाक अंत, CSK फैंस के लिए आज का दिन बना 'ब्लैक डे'! 🚨😭

भारत में E.Sports करियर का सच गेमिंग से पैसे कैसे कमाएं

MS Dhoni Biography in Hindi धोनी का वो दौर जब सिलेक्टर्स नहीं बल्कि थाला तय करते थे टीम की तकदीर