Saransh Jain श्रीलंका टेस्ट सीरीज में मौका मिलते ही रो पड़े सारांश जैन कैंसर से जूझते पिता के कागज के टुकड़े ने ऐसे बदली किस्मत
श्रीलंका के खिलाफ होने वाली टेस्ट सीरीज के लिए जैसे ही भारतीय टीम के नए स्क्वाड का ऐलान हुआ, हर तरफ एक ही नाम की चर्चा शुरू हो गई—सारांश जैन। स्क्वाड की इस नई लिस्ट में यह नाम कई लोगों के लिए बिल्कुल नया था, और हर कोई जानना चाहता है कि आखिर यह खिलाड़ी कौन है जो अचानक देश की सबसे बड़ी टीम में शामिल हो गया है।
आमतौर पर आज के दौर में जब भी कोई नया खिलाड़ी टीम इंडिया की जर्सी तक पहुंचता है, तो उसके पीछे आईपीएल (IPL) की चमक-दमक और करोड़ों का कांट्रैक्ट होता है। लेकिन 33 साल के सारांश जैन की कहानी बिल्कुल अलग है। उनके पास न तो कोई आईपीएल का बड़ा नाम है और न ही वो रातों-रात सोशल मीडिया पर वायरल होकर यहाँ पहुंचे हैं। उन्होंने पिछले 12 सालों से घरेलू क्रिकेट (रंजी ट्रॉफी) के मैदानों पर चुपचाप अपनी उंगलियों का जादू बिखेरा है, खून-पसीना बहाया है और आज उसी शुद्ध मेहनत के दम पर इस मुकाम तक पहुंचे हैं।
बोल नहीं सकते पिता, पर वो कागज के टुकड़े हिला देंगे दिल
सारांश की इस कामयाबी के पीछे एक ऐसी दास्तान छिपी है, जिसे सुनकर किसी भी क्रिकेट प्रेमी का गला भर आएगा। उनके पिता पिछले कई सालों से कैंसर जैसी जानलेवा बीमारी से जंग लड़ रहे हैं। इस भयानक बीमारी के कारण उनके बोलने की शक्ति हमेशा के लिए चली गई। वह अपने बेटे से बोलकर बात नहीं कर पाते, लेकिन एक पिता का हौसला कभी कम नहीं हुआ।
घरेलू क्रिकेट के लंबे सफर में जब सालों की घिसाई के बाद भी सारांश का सिलेक्शन नहीं हो रहा था, तो वह अंदर से पूरी तरह टूट चुके थे। ऐसे हताश कर देने वाले वक्त में उनके पिता उनके पास आते, वो बोल तो सकते नहीं थे, इसलिए एक कागज का टुकड़ा उठाते और अपने कांपते हाथों से उस पर लिखते बेटा हिम्मत मत हारना, तुम्हारी मेहनत एक दिन रंग लाएगी और तुम देश के लिए खेलोगे।
पिता के हाथ से लिखे वो कागज के टुकड़े सारांश के लिए किसी संजीवनी बूटी से कम नहीं थे। आज जब सारांश का सिलेक्शन सीधे टीम इंडिया के स्क्वाड में हुआ है, तो यह उस बेबस पिता के उन अनमोल और खामोश शब्दों की सबसे बड़ी जीत है।
शॉर्टकट ढूंढने वालों के लिए एक बड़ी मिसाल
आजकल के दौर में जहाँ खिलाड़ी 28 या 30 साल की उम्र पार करते ही यह मान लेते हैं कि अब आगे का रास्ता बंद हो चुका है और वे फर्स्ट क्लास क्रिकेट छोड़ टी20 लीग की तरफ भागने लगते हैं, वहाँ 33 की उम्र में सारांश ने एक नया इतिहास रच दिया है। मध्य प्रदेश के लिए खेलते हुए उन्होंने रंजी ट्रॉफी में लगातार अपनी फिरकी से विकेटों की झड़ी लगाई है। उन्होंने साबित कर दिया कि अगर आपकी मेहनत में सच्चाई और सब्र है, तो बिना आईपीएल की तड़क-भड़क के भी आप भारत की टेस्ट टीम का हिस्सा बन सकते हैं।
यह कहानी हर उस इंसान के लिए प्रेरणा है जो मुश्किल वक्त में हार मान लेता है। सारांश जैन ने पूरी दुनिया को दिखा दिया कि भले ही रास्ता कितना भी लंबा और गुमनामी से भरा हो, अगर आपकी जिद पक्की है तो मंजिल एक दिन घुटने टेक ही देती है। आपकी क्या राय है प्लीज नीचे कमेंट बॉक्स में कमेंट करके हमें ज़रूर बताएं अगर पोस्ट अच्छी लगी हो, तो दोस्तों के साथ शेयर करें
... लेखक नेम शानू धोनी सर फैन बॉय...
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