Two Beautiful Indian Stadiums With Zero International Matches: इन 2 आलीशान स्टेडियम में आज तक 1 भी इंटरनेशनल मैच क्यों नहीं हुआ
अगर आप क्रिकेट के दीवाने हैं, तो आपने मुंबई के DY Patil Stadium और सूरत के Lalbhai Contractor Stadium का नाम जरूर सुना होगा। आईपीएल के सीज़न में जब इन स्टेडियम्स की लाइट्स जलती हैं और ड्रोन कैमरे से शॉट लिया जाता है, तो टीवी स्क्रीन पर ये किसी जन्नत से कम नहीं लगते। 50-60 हजार की भीड़, वर्ल्ड-क्लास पिच, और आलीशान वीआईपी बॉक्स—सब कुछ ऑन पॉइंट है।
लेकिन यहाँ एक ऐसा सस्पेंस है जो हर क्रिकेट लवर के दिमाग की बत्ती जला देता है। एक तरफ जहां देश में नए-नए मैदान बनकर तुरंत इंटरनेशनल मैच होस्ट करने लग जाते हैं, वहीं इन दो आलीशान मैदानों को आज तक एक भी इंटरनेशनल वनडे, टेस्ट या टी20 मैच नसीब नहीं हुआ। ऐसा क्यों? क्या यह किसी अंदरूनी राजनीति का शिकार हैं या इसके पीछे कोई ऐसा सीक्रेट है जो फैंस को कभी बताया ही नहीं गया? आइए इस रहस्य से पर्दा उठाते हैं और जानते हैं इन दोनों स्टेडियम्स की पूरी कुंडली।
1. DY Patil Stadium, Navi Mumbai: 55,000 की क्षमता, फिर भी इंटरनेशनल मैचों से दूर!
नवी मुंबई के नेरुल में स्थित DY Patil Stadium को अगर आप पहली बार देखेंगे, तो आपको लगेगा कि आप मेलबर्न या लॉर्ड्स का मैदान देख रहे हैं।
कब बना और क्या है इतिहास? इस स्टेडियम का उद्घाटन साल 2008 में हुआ था। इसे मशहूर आर्किटेक्ट हफीज कॉन्ट्रैक्टर ने डिजाइन किया था। इसकी सबसे बड़ी खासियत इसकी छत है, जिसमें एक भी पिलर (खंभा) नहीं है। यानी आप स्टैंड्स में कहीं भी बैठें, आपके सामने कोई खंभा रुकावट नहीं बनेगा।
यहाँ कौन से बड़े मैच हुए हैं? भले ही यहाँ टीम इंडिया का कोई इंटरनेशनल मैच न हुआ हो, लेकिन यह स्टेडियम बड़े इवेंट्स का गवाह रहा है। 2008 में आईपीएल का सबसे पहला फाइनल (राजस्थान रॉयल्स बनाम चेन्नई सुपर किंग्स) इसी मैदान पर खेला गया था। इसके अलावा 2010 का आईपीएल फाइनल, फीफा अंडर-17 फुटबॉल वर्ल्ड कप के मैच और जस्टिन बीबर जैसे इंटरनेशनल स्टार्स के म्यूजिक कॉन्सर्ट भी यहीं हुए हैं। हाल ही में यहाँ वीमेंस आईपीएल (WPL) और भारत-ऑस्ट्रेलिया महिला टीम के मैच भी खेले गए हैं।
तो फिर पुरुषों का इंटरनेशनल मैच क्यों नहीं हुआ? इसके पीछे असली खेल मुंबई की क्रिकेट पॉलिटिक्स और लॉजिस्टिक्स का है। मुंबई में पहले से ही वानखेड़े स्टेडियम (Wankhede Stadium) और ब्रेबोर्न स्टेडियम (Brabourne Stadium) मौजूद हैं। वानखेड़े स्टेडियम मुंबई क्रिकेट एसोसिएशन (MCA) का हेडक्वार्टर है और बीसीसीआई का गढ़ भी। जब भी मुंबई को कोई इंटरनेशनल मैच मिलता है, तो वो सीधा वानखेड़े की झोली में जाता है। डीवाई पाटिल एक प्राइवेट यूनिवर्सिटी का स्टेडियम है, इसलिए इसे हमेशा 'सौतेला' व्यवहार मिलता है। इसके अलावा, मुंबई शहर से इसकी दूरी और मैच के दिनों में ट्रैफिक मैनेजमेंट भी एक बड़ी वजह बन जाता है।
2. Lalbhai Contractor Stadium, Surat: गुजरात का वो मैदान जिसे सब भूल गए
अब बात करते हैं गुजरात के सूरत शहर में स्थित Lalbhai Contractor Stadium की। जहां अहमदाबाद का नरेंद्र मोदी स्टेडियम दुनिया भर में सुर्खियां बटोरता है, वहीं सूरत का यह मैदान गुमनामी के अंधेरे में खोया हुआ है।
कब बना और क्या है इतिहास? इस स्टेडियम का इतिहास काफी पुराना है, लेकिन इसे आधुनिक रूप साल 2007 के आसपास दिया गया। सूरत डिस्ट्रिक्ट क्रिकेट एसोसिएशन (SDCA) की देखरेख में बने इस स्टेडियम की क्षमता करीब 12,000 से 15,000 दर्शकों की है। यहाँ की पिच को बेहद तेज और बाउंसी माना जाता है, जो तेज गेंदबाजों के लिए किसी स्वर्ग जैसी है।
यहाँ कौन से मैच होते हैं? यह मैदान घरेलू क्रिकेट का एक बड़ा केंद्र रहा है। यहाँ रणजी ट्रॉफी, ईरानी ट्रॉफी और सैय्यद मुश्ताक अली ट्रॉफी के कई कड़े मुकाबले खेले जा चुके हैं। साल 2019 में जब साउथ अफ्रीका की महिला क्रिकेट टीम भारत आई थी, तो भारत और साउथ अफ्रीका के बीच पांच मैचों की टी20 इंटरनेशनल सीरीज़ इसी मैदान पर खेला गया था। यानी महिलाओं का इंटरनेशनल मैच तो यहाँ हुआ, लेकिन मेंस टीम इंडिया आज तक यहाँ कदम नहीं रख पाई।
क्यों लगा है यहाँ इंटरनेशनल मैचों पर ब्रेक? पहली दिक्कत तो इसकी क्षमता (Capacity) है। 15,000 की क्षमता आज के समय में इंटरनेशनल मैचों के लिए काफी कम मानी जाती है, जिससे टिकटों की कमाई सीमित हो जाती है। दूसरी सबसे बड़ी वजह है अहमदाबाद का मोटेरा (नरेंद्र मोदी स्टेडियम) और राजकोट का स्टेडियम। गुजरात क्रिकेट एसोसिएशन (GCA) के पास जब भी किसी इंटरनेशनल मैच की मेजबानी आती है, तो पहली पसंद हमेशा अहमदाबाद या राजकोट होते हैं। सूरत के इस स्टेडियम के पास सुविधाओं की कमी नहीं है, लेकिन बड़े शहरों के रसूखदार स्टेडियम्स के सामने इसकी आवाज बीसीसीआई के गलियारों तक पहुंच ही नहीं पाती।
फाइनल वर्ड: क्या कभी यहाँ बजेगा टीम इंडिया का डंका?
इन दोनों स्टेडियम्स की कहानी देखकर एक बात तो साफ है भारत में इंटरनेशनल मैच पाने के लिए सिर्फ एक खूबसूरत मैदान और अच्छी पिच होना ही काफी नहीं है। इसके लिए तगड़ी पॉलिटिकल एप्रोच, क्रिकेट बोर्ड में रसूख और शहर का बड़ा होना भी मायने रखता है।
डीवाई पाटिल स्टेडियम आज भी आईपीएल टीमों के लिए एक पसंदीदा प्रैक्टिस ग्राउंड और वीमेंस क्रिकेट का बड़ा हब बना हुआ है, जबकि लालाभाई कॉन्ट्रैक्टर स्टेडियम गुजरात के युवा क्रिकेटरों को तराशने में लगा है। फैंस आज भी यही उम्मीद करते हैं कि कभी तो बीसीसीआई की रोटेशन पॉलिसी इन मैदानों पर मेहरबान होगी और हमें ब्लू जर्सी में टीम इंडिया यहाँ चौके-छक्के उड़ाती हुई दिखेगी।
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... लेखक नेम शानू धोनी सर फैन बॉय...
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