15 August Special आज़ादी का वो जश्न, 7:29 PM पर MS Dhoni का संन्यास और एक महान युग का अंत
15 अगस्त 1947 का वो ऐतिहासिक दिन था जब हमारा भारत देश सदियों की गुलामी की जंजीरों को तोड़कर आज़ाद हुआ था। इस पावन दिन पर हमें अपने प्यारे भारत में सीना तानकर जीने, सांस लेने और अपने सपनों को पूरा करने की आज़ादी मिली थी। 15 अगस्त 1947 से एक नए भारत का, एक नए युग का आगाज़ हुआ था। जब-जब 15 अगस्त आता है, हमारा दिल देशभक्ति के जूनून से भर जाता है और हवाओं में राष्ट्रगान की गूंज हर भारतीय के रोंगटे खड़े कर देती है।
लेकिन इसी 15 अगस्त की तारीख के पन्नों में एक ऐसा दर्द भी दर्ज है, जिसे कोई क्रिकेट प्रेमी कभी नहीं भूल सकता। जहाँ 15 अगस्त 1947 को एक महान भारत के नए युग की शुरुआत हुई थी, वहीं ठीक 73 साल बाद, 15 अगस्त 2020 की शाम 7:29 PM पर क्रिकेट के एक सुनहरे युग का अंत हो गया था
माँ की कोख से जन्म लेते हैं बच्चे, पर सदियों में आता है एक महापुरुष
कहा जाता है कि हर माँ की कोख से एक बच्चा जन्म लेता है, लेकिन किसी-किसी माँ की किस्मत में ही एक ऐसे महापुरुष को जन्म देना लिखा होता है जो पूरे देश की तकदीर बदल देता है। हमारे 'थाला', हमारे माही, द लीजेंड कैप्टन कूल MS Dhoni भी उसी माँ के लाडले थे
राँची की छोटी सी गलियों से निकलकर पूरी दुनिया पर राज करने वाले माही ने हमें सिर्फ मैच जीतना नहीं सिखाया, बल्कि यह सिखाया कि सबसे मुश्किल हालातों में भी शांत रहकर इतिहास कैसे रचा जाता है। 2007 का T20 World Cup हो, 2011 का वो यादगार छक्का हो या 2013 की Champions Trophy माही ने हर भारतीय को गर्व से झूमने का मौका दिया
15 August 2020, 7:29 PM जब खुशियों के बीच हर फैन का दिल टूट गया
सोचिए, एक तरफ पूरा देश 15 अगस्त की आज़ादी की खुशियों में डूबा हुआ था, और दूसरी तरफ अचानक सोशल मीडिया पर एक छोटी सी क्लिप आती है—'मैं पल दो पल का शायर हूँ...' और साथ में एक सन्नाटा पसार देने वाला संदेश मुझे शाम 19:29 बजे से संन्यास लिया हुआ समझें।
बिना किसी फेयरवेल मैच के, बिना किसी बड़े भाषण के, हमेशा की तरह एकदम खामोश और अपने अनोखे अंदाज़ में माही ने इंटरनेशनल क्रिकेट को अलविदा कह दिया था। उस 7:29 PM के समय ने 140 करोड़ देशवासियों का दिल एक पल में तोड़ दिया। सच कहें तो, 2020 के उस दिन के बाद से बहुत से क्रिकेट प्रेमियों के दिल से क्रिकेट देखने का वो जुनून ही खत्म हो गया। आज भी जब कोई मैच टीवी पर आता है, तो दिल से बस यही आवाज़ निकलती है
I Miss You Mahi Sir
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1947 से आज तक: देश का सम्मान और एमएस धोनी का रिश्ता
1947 में मिली आज़ादी के बाद से लेकर आज तक, देश का नाम रोशन करने वाले कई खिलाड़ी आए, लेकिन एमएस धोनी के लिए 'देशभक्ति' हमेशा सबसे ऊपर रही। जब बेटी ज़ीवा के जन्म के समय वो देश से दूर टी-20 वर्ल्ड कप की तैयारियों में थे और उनसे पूछा गया, तो उनका सीधा और साफ जवाब था मैं नेशनल ड्यूटी पर हूँ, बाकी सब इंतज़ार कर सकता है।
धोनी ने हमेशा यह साबित किया कि उनके लिए देश और तिरंगा सबसे पहले आता है। जब भी वो नीली जर्सी पहनकर मैदान पर उतरते थे, तो लगता था कि सरहद का एक सच्चा सिपाही क्रिकेट की पिच पर देश का मान बढ़ा रहा है।
आज़ादी का सलाम और हमारे 'थाला' को नमन!
आज जब हम स्वतंत्रता दिवस का जश्न मना रहे हैं और तिरंगे को नमन कर रहे हैं, तो अपने देश के अमर शहीदों के साथ-साथ दिल के एक कोने में अपने 'कैप्टन कूल' को याद करना भी लाजमी हो जाता है।
15 अगस्त का दिन हमें जहाँ एक तरफ देश की आज़ादी पर गर्व करना सिखाता है, वहीं दूसरी तरफ हमें उस महान कप्तान की याद दिलाता है जिसने भारतीय क्रिकेट को दुनिया के शिखर पर पहुँचाया। आइए इस पावन अवसर पर अपने देश के वीरों को और क्रिकेट के इस महान नायक को दिल से प्रणाम करें
आप सभी को स्वतंत्रता दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं! जय हिंद, जय भारत 🇮🇳
दोस्तों, क्या 2020 में माही के जाने के बाद आपका भी क्रिकेट देखने का वो मज़ा थोड़ा कम हो गया है? क्या आज भी आपको उस 7:29 PM वाले लम्हे की याद सताती है? अपनी भावनाएं नीचे कमेंट बॉक्स में ज़रूर शेयर करें और इसे अपने क्रिकेट प्रेमी दोस्तों के साथ शेयर करना बिल्कुल न भूलें
... लेखक नेम शानू धोनी सर फैन बॉय...
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