Australia Test Team Selection Controversy ऑस्ट्रेलिया क्रिकेट में मचा भयंकर हड़कंप बांग्लादेश से शर्मनाक हार के बाद टीम से बाहर होंगे ये 3 दिग्गज


क्रिकेट की दुनिया में एक बहुत पुरानी बात है घमंड जब टूटता है न, तो उसकी आवाज़ बहुत दूर तक जाती है और दर्द सालों-साल तक रहता है। बांग्लादेश के खिलाफ मिली उस ऐतिहासिक और शर्मनाक हार के बाद से ऑस्ट्रेलियाई क्रिकेट के गलियारों में सन्नाटा तो पसरा ही है, लेकिन अंदर ही अंदर एक ज़बरदस्त भूचाल भी आ चुका है।

​यह सिर्फ एक आम टेस्ट मैच हारने की बात नहीं है, बात उस सुस्ती और अति-आत्मविश्वास की है जिसमें यह पूरी टीम पिछले कुछ समय से आराम से सो रही थी। ऑस्ट्रेलिया को शुरू से ही देखा जाए तो यह एक बेहद खतरनाक और अनबीटेबल टीम मानी जाती थी। उस दौर में ऑस्ट्रेलिया को हराने का सीधा सा मतलब होता था कि किसी ने बहुत बड़ा युद्ध जीत लिया हो।

​सिडनी से लेकर मेलबर्न और कैनबरा तक के खेल गलियारों में अब बस एक ही बात गूंज रही है कि सिलेक्टर्स अब किसी भी खिलाड़ी पर दया दिखाने के मूड में बिल्कुल नहीं हैं। वैसे अगर क्रिकेट का इतिहास उठाकर देखा जाए, तो जब-जब ऑस्ट्रेलियाई क्रिकेट बोर्ड बैकफुट पर आया है, उसने बेहद बेरहमी से सख्त फैसले लिए हैं।

​उन्हें इस बात से रत्ती भर भी फर्क नहीं पड़ता कि सामने खिलाड़ी का नाम कितना बड़ा है या उसका कद कितना विशाल है। 1980 के दशक में जब उनकी टीम बिखरी थी, तब भी रातों-रात बड़े-बड़े दिग्गजों को बाहर का रास्ता दिखाकर नई फौज खड़ी कर दी गई थी।

​बांग्लादेश के खिलाफ इस सीरीज से पहले हुए तीन दिवसीय वॉर्म-अप मैच की तस्वीर याद कीजिए, जहां ऑस्ट्रेलिया की ए टीम ने बांग्लादेश को महज़ 54 रनों पर ढेर करके एकतरफा जीत दर्ज की थी। जब जूनियर और बैकअप खिलाड़ी उसी पिच पर इतना बेखौफ और शानदार प्रदर्शन कर रहे हैं, तो सवाल उठना लाजमी है कि आखिर देश के ये बड़े-बड़े खिलाड़ी मुख्य मैदान पर कर क्या रहे हैं?
​ऑस्ट्रेलिया का यह भयंकर डाउनफॉल देखकर आज हर कोई हैरान है और अब तो सिलेक्टर्स को भी समझ आ गया है कि सीनियर टीम के इस खराब प्रदर्शन को बिना कड़े फैसलों के नहीं सुधारा जा सकता।

​बांग्लादेश की युवा और जोशीली टीम ने उन्हें उन्हीं के जाल में फंसाकर जिस तरह पछाड़ा है, उसने ऑस्ट्रेलियाई टेस्ट सेटअप में लापरवाही की पूरी पोल खोलकर रख दी है। इस हार के बीच हालांकि स्टीव स्मिथ ने पहली पारी में 71 और दूसरी में 44 रन बनाकर संघर्ष दिखाया, वहीं कैमरन ग्रीन ने भी दूसरी पारी में शानदार शतक जड़कर अपनी जगह बचा ली है, लेकिन बाकी बल्लेबाजों का फ्लॉप शो टीम को ले डूबा।

​ट्रेविस हेड के साथ नए ओपनर जेक वेदरअल्ड से शुरुआत कराने का प्रयोग हो या फिर मिडिल ऑर्डर में बाकी खिलाड़ियों की नाकामी, टीम का टॉप और लोअर-मिडिल ऑर्डर शुरुआती दबाव झेलने में पूरी तरह से नाकाम साबित हो रहा है।

​अब ऑस्ट्रेलिया के खेल पत्रकारों और क्रिकेट फैंस के बीच सबसे बड़ा सवाल यही है कि वो कौन-से 3 सटीक नाम हैं जिन पर अगले टेस्ट से गाज गिरना लगभग तय माना जा रहा है। सबसे पहला नाम 3 नंबर पर खेलने वाले मार्नस लाबुशेन का है। लाबुशेन पहली पारी में सिर्फ 1 रन और दूसरी पारी में 31 रन ही बना सके। उन्हें हर बार शुरुआत तो मिल रही है, लेकिन वो उसे किसी बड़ी पारी में तब्दील नहीं कर पा रहे हैं।

​दूसरा बड़ा नाम नए ओपनर जेक वेदरअल्ड का है, जो मिले इतने बड़े मौके को भुना नहीं पाए और दोनों पारियों में सस्ती शुरुआत देकर पवेलियन लौट गए। वहीं तीसरा नाम ऑलराउंडर ब्यू वेबस्टर का है, जिनका लोअर-मिडिल ऑर्डर में खराब प्रदर्शन और निरंतरता की कमी टीम पर भारी पड़ रही है।

​सामने अब बांग्लादेश के खिलाफ दूसरा टेस्ट मैच खड़ा है और सिलेक्टर्स के पास गलतियों को सुधारने का यह आखिरी मौका है। अगर ऑस्ट्रेलिया को आने वाले वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप WTC के फाइनल की रेस में बने रहना है और अपनी खोई हुई साख को वापस पाना है, तो उन्हें तुरंत अपनी जिद छोड़कर यंग ब्लड' यानी भूखे युवा खिलाड़ियों को मौका देना ही पड़ेगा।

​रिकी पोंटिंग जैसे पूर्व कप्तान और दिग्गज तो पहले ही टीवी पर बैठकर खुलेआम कह चुके हैं कि अब पानी सिर से ऊपर जा चुका है और बिना बात का बचाव बंद होना चाहिए। क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया के बंद कमरों में बैठकों का दौर जारी है।

​यकीन मानिए, दूसरे टेस्ट की प्लेइंग इलेवन या अगली टेस्ट सीरीज के ऐलान में लाबुशेन, वेदरअल्ड और वेबस्टर जैसे खिलाड़ियों पर तलवार चलना तय माना जा रहा है। यह हार ऑस्ट्रेलियाई क्रिकेट के एक नए और कड़े दौर की शुरुआत है, और यह बदलाव देखने में जितना दिलचस्प होगा, उनके फैंस के लिए उतना ही दर्दनाक।

ऑस्ट्रेलियाई क्रिकेट में डार्विन टेस्ट में बांग्लादेश के हाथों मिली यह ऐतिहासिक हार एक बहुत बड़ा चेतावनी का संकेत है। केवल दो या तीन सीनियर खिलाड़ियों (जैसे खराब फॉर्म से जूझ रहे टॉप-ऑर्डर बल्लेबाजों) को टीम से बाहर कर देना इस समस्या का स्थायी समाधान नहीं हो सकता।

अक्सर जब सीनियर खिलाड़ी निशाने पर आते हैं, तो टीम के कुछ अन्य खिलाड़ियों की कमियां और मिडिल ऑर्डर का बिखराव छुप जाता है। असली सवाल यह है कि क्या सिर्फ चेहरों को बदलने से ऑस्ट्रेलियाई टीम की वो पुरानी कंगारू वाली आक्रामकता वापस आ पाएगी, या फिर पूरी टीम के कॉम्बिनेशन और रणनीति में बड़े बदलाव की जरूरत है

आपकी क्या राय है क्या इन खिलाड़ियों को ड्रॉप करना टीम के री-बिल्डिंग की सही शुरुआत होगी, या कुछ और बड़े खिलाड़ी हैं जो इस विवाद के पीछे छुप रहे हैं? अपनी राय नीचे कमेंट सेक्शन में जरूर शेयर करें अगर आपको यह अपडेट पसंद आई हो, तो इसे अपने क्रिकेट लवर दोस्तों के साथ शेयर करना बिल्कुल न भूलें! क्रिकेट की हर छोटी-बड़ी लाइव अपडेट्स के लिए हमारे साथ बने रहें


                            ... लेखक नेम शानू धोनी सर फैन बॉय... 

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