Cricketer Ads Truth क्या हमारे पसंदीदा क्रिकेटर सच में वही खाते हैं जो टीवी और फोन पर बेचते हैं?
हाल ही में सोशल मीडिया पर एक रील काफी वायरल हुई थी। उसमें एक बंदा 10-12 साल के बच्चे से पूछता है तुम यह सब क्यों खाते हो डर नहीं लगता बच्चा इतने आत्मविश्वास से जवाब देता है अरे, जब टीवी और फोन पर बड़े-बड़े क्रिकेटर्स यह सब खा रहे हैं और उन्हें कुछ नहीं हुआ, तो हमें क्या होगा
यह सिर्फ एक सोशल मीडिया वीडियो नहीं है, यह आज की हकीकत है
हमारे देश में क्रिकेट को एक धर्म की तरह देखा जाता है। मैदान पर शानदार खेल दिखाने वाले खिलाड़ी लाखों-करोड़ों युवाओं के लिए रोल मॉडल होते हैं। लेकिन क्या कभी सोचा है कि जो एथलीट्स अपनी फिटनेस के लिए दिन-रात मेहनत करते हैं, वही स्क्रीन पर आकर हमें और हमारी नई पीढ़ी को क्या-क्या बेच रहे होते हैं?
आइए इस पूरे खेल का असली सच समझते हैं!
1. फिटनेस डाइट बनाम ₹5 का पैकेट: क्या है असली फर्क?
एक प्रोफेशनल क्रिकेटर बनने और इंटरनेशनल लेवल पर टिके रहने के लिए सख्त अनुशासन की जरूरत होती है।
उनकी डाइट में अतिरिक्त चीनी, प्रोसेस्ड फूड और ऑयली चीज़ों की कोई जगह नहीं होती।
मैच और प्रैक्टिस के दौरान उनकी बॉडी रिकवरी के लिए न्यूट्रिशनिस्ट और फिटनेस कोच की पूरी टीम तैनात रहती है।
लेकिन वही खिलाड़ी टीवी स्क्रीन और मोबाइल ऐप्स पर मुस्कुराते हुए क्या प्रमोट करते दिखते हैं?
सोडा और हाई-शुगर ड्रिंक्स: एनर्जी और 'कूलनेस' के नाम पर बेचे जाने वाले पेय पदार्थ, जिनमें चीनी की मात्रा बहुत ज्यादा होती है।
पैक्ड स्नैक्स और जंक फूड: ऑयली चिप्स, मैदे वाले नूडल्स और प्रिजर्वेटिव्स से भरे प्रोसेस्ड स्नैक्स।
फैंटेसी गेमिंग ऐप्स: 'दिमाग लगाओ और टीम बनाओ' के नाम पर युवाओं को सट्टेबाजी और वित्तीय जोखिम की तरफ धकेलने वाले प्लेटफॉर्म्स।
सरोगेट माउथ फ्रेशनर (इलायची): टीवी पर 'प्रीमियम इलायची' या 'माउथ फ्रेशनर' के नाम से दिखाए जाने वाले विज्ञापन, जिनका सीधा कनेक्शन तंबाकू और पान मसाला ब्रांड्स से होता है।
अब विचार कीजिए, जो चीज़ें खिलाड़ी खुद अपनी पर्सनल डाइट में शामिल नहीं कर सकते, उन्हें केवल प्रचार के ज़रिए प्रमोट किया जाता है।
2. नई जनरेशन और बच्चों पर इसका असर
युवा और छोटे बच्चे अपने पसंदीदा खिलाड़ियों को अपना आदर्श मानते हैं।
जब कोई बच्चा या यंग टीनेजर फोन पर स्क्रॉल करते हुए देखता है कि उनका पसंदीदा एथलीट किसी अनहेल्दी प्रोडक्ट को हाथ में लेकर स्वैग दिखा रहा है, तो उसके अवचेतन मन में यह बात बैठ जाती है कि—"यह चीज़ इस्तेमाल करने में कोई बुराई नहीं है, यह तो ट्रेंडिंग है!"
इसी वजह से आज की नई पीढ़ी कम उम्र में ही खराब खान-पान और अनहेल्दी लाइफस्टाइल की शिकार हो रही है। खेल का स्टाइल और एटीट्यूड कॉपी करने के चक्कर में बच्चे अपनी सेहत के साथ समझौता कर बैठते हैं।
3. यह सिर्फ '30-सेकंड का रोल' है, कोई निजी सलाह नहीं!
ब्रांड एंडोर्समेंट की दुनिया का सीधा नियम है—जिसकी फैन फॉलोइंग जितनी ज्यादा, उसकी मार्केट वैल्यू उतनी बड़ी
कंपनियों को अच्छी तरह पता है कि क्रिकेटर्स की बात पर देश का युवा आसानी से भरोसा कर लेता है। इसलिए कंपनियां भारी-भरकम कॉन्ट्रैक्ट्स ऑफर करती हैं।
खिलाड़ियों के लिए यह एक प्रोफेशनल डील या 30 सेकंड की शूटिंग होती है। शूट खत्म होते ही वो अपनी अनुशासित लाइफस्टाइल में लौट जाते हैं। लेकिन नुकसान उस आम फैन का होता है, जो इस विज्ञापन को खिलाड़ी की 'पर्सनल रिकमेंडेशन' समझ लेता है।
4. एक समझदार फैन के तौर पर हमें क्या करना चाहिए?
मैदान पर खिलाड़ियों के खेल, अनुशासन और मेहनत की तारीफ करना बिल्कुल सही है। लेकिन स्क्रीन पर बिकने वाले हर प्रोडक्ट को अपनी जिंदगी में उतारना समझदारी नहीं है।
खिलाड़ियों की मेहनत, फिटनेस और लगन से प्रेरणा लें।
लेकिन 30 सेकंड के विज्ञापनों में प्रमोट किए जा रहे अनहेल्दी प्रोडक्ट्स को स्क्रीन तक ही सीमित रहने दें।
अगली बार जब फोन या टीवी पर कोई आकर्षक विज्ञापन दिखे, तो खुद से बस एक सवाल पूछें—"क्या यह खिलाड़ी खुद इस चीज़ का सेवन करता होगा?" जवाब आपको अपने आप मिल जाएगा
यह लेख केवल सामान्य जागरूकता और खेल विज्ञापनों के सामाजिक-सांस्कृतिक प्रभाव पर आधारित एक विश्लेषणात्मक विचार है। इसका उद्देश्य किसी व्यक्ति, खिलाड़ी या ब्रांड विशेष पर व्यक्तिगत टिप्पणी करना नहीं है।
आपकी क्या राय है?
क्या आपको लगता है कि जो क्रिकेटर्स दिन-रात फिटनेस की बात करते हैं, वो खुद भी इन चीज़ों का सेवन करते होंगे? या फिर विज्ञापनों का ठेका लेते वक्त उनके मन में कभी यह ख्याल आता होगा कि उनकी इस एक '30-सेकंड की एक्टिंग' का असर देश की आने वाली नई पीढ़ी पर क्या पड़ रहा है
आप इस पूरे खेल के बारे में क्या सोचते हैं नीचे कमेंट बॉक्स में अपनी राय ज़रूर शेयर करें!
और हाँ, अगर आपके आसपास भी ऐसे क्रिकेट लवर्स हैं जो अपने क्रिकेट आइडल्स को भगवान की तरह मानते हैं और आंख बंद करके उनके विज्ञापनों पर भरोसा कर लेते हैं, तो उनके साथ यह कड़वा सच शेयर करना बिल्कुल न भूलें
... लेखक नेम शानू धोनी सर फैन बॉय...
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