Cricketers Qualification क्या स्पोर्ट्स में कामयाबी और Success के लिए पढ़ाई ज़रूरी है जानिए रिपोर्ट कार्ड बनाम जुनून का सच


आज भी हमारे देश में जैसे ही रिजल्ट का दिन आता है, हर दूसरे घर में एक ही घिसा-पिटा डायलॉग सुनने को मिलता है पढ़ोगे-लिखोगे तो बनोगे नवाब खेलोगे-कूदोगे तो होगे खराब।

​लेकिन कभी आपने ठंडे दिमाग से बैठकर सोचा है कि क्या आज के दौर में यह बात 1% भी सच है जवाब है बिल्कुल नहीं 

​आज स्पोर्ट्स की दुनिया ने इस पुरानी सोच की धज्जियां उड़ा दी हैं। मैदान में दिन-रात पसीना बहाकर इतिहास रचने वाले खिलाड़ियों ने पूरी दुनिया को यह समझा दिया है कि आपकी Success कागज़ की एक मार्कशीट तय नहीं करती, बल्कि आपके अंदर का जुनून तय करता है।

क्रिकेट के मैदान पर मार्कशीट नहीं बिकती

जब कोई युवा खिलाड़ी हाथ में बल्ला या गेंद लेकर मैदान में उतरता है, तो कोई कोच या सिलेक्टर उससे यह नहीं पूछता कि उसके 10वीं या 12वीं में कितने परसेंट आए थे।

​मैदान में सिर्फ और सिर्फ आपका हुनर, आपकी टाइमिंग और आपकी मेहनत देखी जाती है।

सचिन तेंदुलकर और क्रिकेट का जुनून

उदाहरण के लिए सचिन तेंदुलकर को ही देख लीजिए। बहुत कम उम्र में ही सचिन ने पढ़ाई-लिखाई की जगह क्रिकेट के मैदान को चुना। जिस उम्र में बच्चे किताबों में नंबर ढूंढते हैं, उस उम्र में सचिन मुंबई के मैदानों में पसीना बहा रहे थे। अगर वे सिर्फ पढ़ाई के पीछे भागते रहते, तो शायद आज भारत को अपने 'गॉड ऑफ क्रिकेट' और यह महान लेजेंड कभी न मिलते

रिंकू सिंह गरीबी और 9वीं फेल से सुपरस्टार बनने तक का खतरनाक सफर

अगर आप संघर्ष और जुनून की सबसे बड़ी मिसाल देखना चाहते हैं, तो रिंकू सिंह की कहानी आपकी रोंगटे खड़े कर देगी! अलीगढ़ का यह लड़का 9वीं कक्षा में फेल हो गया था और घर की आर्थिक हालत इतनी खराब थी कि उन्हें पोछा (झाड़ू-पोछा) लगाने तक का काम ऑफर हुआ था।

​लेकिन रिंकू ने अपने क्रिकेट के सपने से कभी समझौता नहीं किया। 9वीं फेल होने और अपार गरीबी के बावजूद रिंकू ने बल्ला नहीं छोड़ा। नतीजा? आज वही लड़का जब मैदान में उतरता है, तो आखिरी ओवर की 5 गेंदों पर लगातार 5 छक्के ठोककर पूरी दुनिया को अपना दीवाना बना देता है! क्या किसी रिपोर्ट कार्ड में यह ताकत थी कि वो रिंकू का यह हुनर छीन सके बिल्कुल नहीं

धोनी और सहवाग का ज़बरदस्त उदाहरण

इसी तरह एमएस धोनी को देखिए। धोनी के पास एक सेफ सरकारी नौकरी थी और पढ़ाई का सीधा रास्ता था। लेकिन उनके अंदर क्रिकेट का ऐसा भूत सवार था कि उन्होंने उस कम्फर्ट ज़ोन को लात मार दी। अगर वे सिर्फ पढ़ाई और नौकरी के भरोसे बैठे रहते, तो भारत को हमारे 'कैप्टन कूल माही थाला' कभी न मिलते और ना ही वे दो-दो ऐतिहासिक वर्ल्ड कप हमारे पास होते

​वहीं वीरेंद्र सहवाग की बात करें, तो उनका मन कभी किताबों के पन्नों में नहीं लगा। लेकिन जब वे क्रीज़ पर उतरते थे, तो दुनिया के सबसे खौफनाक गेंदबाजों के पसीने छूट जाते थे।

क्या मांगता है खेल का मैदान

चाहे क्रिकेट हो, फुटबॉल हो या कोई भी खेल, Success आपसे कभी किसी बड़े कॉलेज का ठप्पा नहीं मांगती। खेल सिर्फ आपसे आपके काम के प्रति 100% ईमानदारी मांगता है।

​यह मैदान आपसे रोज़ सुबह 4 बजे उठकर घंटों पसीना बहाने का जज़्बा मांगता है। और सबसे ज़रूरी बात, यह आपसे अपने गोल पर पक्का फोकस मांगता है—चाहे दुनिया आपके बारे में कुछ भी बोले।

एक ज़रूरी बात

अगर आप एक पेरेंट हैं तो अपने बच्चे को सिर्फ किताबी कीड़ा बनाने की रेस में मत दौड़ाइए। पढ़ाई अपनी जगह ज़रूरी है, लेकिन पढ़ाई ही सब कुछ नहीं है।

​अगर आपके बच्चे के अंदर क्रिकेट या किसी और खेल को लेकर सच्चा जुनून दिखता है, तो उसके पंख काटने की जगह उसकी ढाल बनिए।

यह सिर्फ स्पोर्ट्स की बात नहीं है

उदाहरण के तौर पर सच कहें तो यह बात सिर्फ स्पोर्ट्स तक सीमित नहीं है। आप लाइफ में किसी भी लाइन में हों चाहे बिज़नेस हो एक्टिंग हो, सोशल मीडिया कंटेंट क्रिएशन हो  इन्फ्लुएंसिंग हो या कोई भी और फील्ड। अगर आपके अंदर अपने सपनों को पूरा करने की भूख है, तो बस अपने गोल पर काम करते रहिए।

​ज़रूरी नहीं कि आप हमेशा 10वीं या 12वीं की मार्कशीट पर ही डिपेंड रहें। बुनियादी पढ़ाई ज़रूरी है, लेकिन आपकी असली पहचान और आपकी Success आपकी मेहनत और आपका हुनर बनाता है।

​हम जानते हैं कि हर घर की परिस्थिति एक जैसी नहीं होती, हर किसी को एक जैसी सहूलियतें नहीं मिलतीं। लेकिन रिंकू सिंह और सचिन तेंदुलकर जैसे उदाहरण हमें सिखाते हैं कि अगर आपके अंदर ईमानदारी से दिन-रात मेहनत करने का जज़्बा है, तो खुद पर भरोसा रखिए एक न एक दिन आपको आपकी मंजिल ज़रूर मिलेगी

​याद रखिए मार्कशीट के नंबर आपका Future तय नहीं करते, आपकी मेहनत और खेल का जुनून तय करता है कि आप ज़िंदगी में कहाँ तक जाएँगे

​क्या आपको भी लगता है कि ज़िंदगी या स्पोर्ट्स में आगे बढ़ने के लिए सिर्फ 10वीं-12वीं की मार्कशीट ही सब कुछ नहीं है, बल्कि काम के प्रति ईमानदारी और मेहनत सबसे ज़्यादा ज़रूरी है इस पर आपकी क्या राय है हमें नीचे कमेंट बॉक्स में कमेंट करके ज़रूर बताएं

​अगर आपको यह दिल से पसंद आया हो, तो इसे अपने क्रिकेट लवर दोस्तों और उन पेरेंट्स के साथ शेयर करना बिल्कुल भी न भूलें जो सिर्फ पढ़ाई पर दबाव बनाते हैं। क्रिकेट की ऐसी ही रोचक कहानियों और हर ताज़ा अपडेट के लिए हमारे साथ बने रहें



                          ... लेखक नेम शानू धोनी सर फैन बॉय... 

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