IPL 2026 Auction विदेशी चेहरों का अंधा मोह या भारतीय युवाओं का जलवा Dressing Room का वो सच जो कोई नहीं बताता


कल रात मैं और मेरा भाई टीवी पर IPL 2026 Auction की हाइलाइट्स देख रहे थे। अचानक भाई ने रिमोट टेबल पर पटका और बोला यार एक बात बता इस लीग का नाम Indian प्रीमियर लीग है या Foreign प्रीमियर लीग मैंने हंसकर पूछा कि भाई ऐसा क्या हो गया तो उसने जो पूरा गणित समझाया उसने मेरा दिमाग हिला दिया। और सच कहूं तो यही वो कड़वा सच है जो हर सच्चे क्रिकेट प्रेमी के दिल में इस समय खदबद कर रहा है।

​हम सब देख रहे हैं कि इस बार का मिनी-ऑक्शन बड़ा अनोखा रहा। एक तरफ तो लगा कि हमारे घरेलू लड़कों के दिन पूरी तरह बहुर गए हैं लेकिन दूसरी तरफ जब बड़े खिलाड़ियों की बात आई, तो फ्रेंचाइजियों का वही पुराना 'विदेशी मोह' सामने आ गया।

​30 लाख के खिलाड़ियों के लिए जब टेबल पर मची महाभारत

​इस बार ऑक्शन का सबसे मजेदार ड्रामा प्रशांत वीर और कार्तिक शर्मा जैसे Uncapped भारतीय खिलाड़ियों के नाम पर हुआ। आपको जानकर हैरानी होगी कि इन दोनों का बेस प्राइस सिर्फ 30-30 लाख रुपये था! लेकिन इनके लिए जो लड़ाई हुई, वो किसी फिल्मी क्लाइमेक्स से कम नहीं थी।

​बोली की शुरुआत में मुंबई इंडियंस (MI) और लखनऊ सुपर जायंट्स (LSG) ने शुरुआती पैडल उठाए। हालांकि, मुंबई के पास पर्स बेहद खाली था, इसलिए जैसे ही बोली उनके बजट के पार गई, उन्हें मजबूरी में बहुत जल्दी पीछे हटना पड़ा। लेकिन असली गेम तो इसके बाद शुरू हुआ!

​जब बोली करोड़ों में पहुंची, तो राजस्थान रॉयल्स (RR) ने प्रशांत वीर के लिए और कोलकाता नाइट राइडर्स (KKR) ने कार्तिक शर्मा के लिए बीच में आकर ऐसी एंट्री मारी कि दोनों खिलाड़ियों की बोली सीधे रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई। इसके बाद सनराइजर्स हैदराबाद (SRH) ने तो प्रशांत वीर के लिए सीधे 14 करोड़ रुपये तक का भारी-भरकम दांव खेल दिया! आखिर में जब चेन्नई सुपर किंग्स (CSK) ने ₹14.20 करोड़ की आखिरी बोली लगाई, तब जाकर हैदराबाद पीछे हटी।

​हालांकि ये रकम लिमिट से बहुत ज्यादा थी, लेकिन अच्छी बात यह रही कि दोनों खिलाड़ियों ने 2026 के आईपीएल में कमाल का प्रदर्शन करके इस पैसे को पूरी तरह वसूल कर दिया। एक भारतीय फैन होने के नाते मुझे और मेरे भाई को बहुत खुशी हुई कि चलो, हमारे अपने देसी टैलेंट के घर में लक्ष्मी आई।

​लेकिन विदेशी नामों पर ये अंधा पैसा कब तक लुटेगा 

​पर भाई, असली गुस्सा तो तब आता है जब आप विदेशी खिलाड़ियों पर लुटाए जा रहे पैसों को देखते हो। अब किसी एक टीम की बात नहीं है, लगभग सभी 10 टीमें इस बीमारी से जूझ रही हैं। केकेआर (KKR) और सीएसके (CSK) के बीच कैमरन ग्रीन को लेने के लिए लंबी टक्कर चली, और आखिरकार केकेआर ने उन्हें 25 करोड़ रुपये से ज्यादा की भारी-भरकम कीमत पर खरीदा। सोचा था कि वो एक ऑलराउंडर हैं—बैटिंग, बॉलिंग, फील्डिंग सब करेंगे।

​लेकिन हुआ क्या? ऑस्ट्रेलिया की इंटरनेशनल टीम ने दबाव डाला कि भाई अपना वर्कलोड मैनेज करो, आईपीएल में बॉलिंग मत करो! नतीजा? वो करोड़ों रुपये लेने के बाद सिर्फ एक बल्लेबाज के तौर पर खेले और उसमें भी रन नहीं बने। फ्रेंचाइजी का पैसा सीधे पानी में गया!

​ऐसा ही कुछ मथीशा पथिराना के साथ हुआ। सीएसके ने अपना पर्स बचाने के लिए उन्हें रिलीज किया और दोबारा उन पर कोई खास इंटरेस्ट नहीं दिखाया। फिर क्या था, लखनऊ और केकेआर में पैडल उठाने की होड़ मच गई और देखते ही देखते पथिराना 18 करोड़ में बिक गए। सिर्फ ग्रीन या पथिराना ही क्यों, निकोलस पूरन, मार्कस स्टोइनिस, मिचेल मार्श जैसे न जाने कितने विदेशी नाम हैं जिन पर फ्रेंचाइजियां आंख बंद करके खजाना खाली कर देती हैं। दो-चार मैचों के जलवे के लिए इतने-इतने करोड़ लुटा देना कहां की समझदारी है भाई?

​हमारा विरोध विदेशी खिलाड़ियों से नहीं, 'विदेशी हुकूमत' से है!

​यहाँ बात साफ कर दूं हमारा टारगेट यह बिल्कुल नहीं है कि आईपीएल में विदेशी खिलाड़ी न खेलें। अरे, वो जरूर खेलें, नियम के मुताबिक 4 विदेशी खिलाड़ी मैदान पर उतरें, हमें कोई दिक्कत नहीं है। लेकिन दिक्कत तब होती है जब पूरा मैनेजमेंट ही विदेशियों के हवाले कर दिया जाता है।

​ज़रा आईपीएल टीमों के हेड कोच की ये करंट लिस्ट उठाकर देखिए, आंखें खुल जाएंगी

​CSK: स्टीफन फ्लेमिंग (जिन्होंने अब संन्यास का मन बना लिया है)

​Mumbai Indians (MI): महेला जयवर्धने

​RCB: एंडी फ्लावर

​LSG: जस्टिन लैंगर

​Punjab Kings: रिकी पोंटिंग

​Rajasthan Royals: कुमार संगाकारा

​SRH: डेनियल वेटोरी

​10 में से 7 टीमों के हेड कोच विदेशी हैं और तो और, कई टीमों के न बैटिंग कोच भारतीय हैं न बॉलिंग कोच। जब इस टूर्नामेंट का नाम Indian प्रीमियर लीग है, तो भारत का महत्व हर जगह से क्यों हटाया जा रहा है? रणनीति बनाने के लिए हमेशा इन गोरे चेहरों की तरफ ही क्यों ताकते हो?

​क्या हमारे पास कप्तानी और मैच पलटने का तगड़ा तजुर्बा रखने वाले दिग्गजों की कमी है? युवराज सिंह, सुरेश रैना, मुरली विजय इन भाइयों ने सालों तक इन फ्रेंचाइजियों के लिए अपना खून-पसीना बहाया है, इन्हें लोकल पिचों की रग-रग का पता है। जब हमारे युवा भारतीय खिलाड़ी टीम की रीढ़ की हड्डी बन रहे हैं, तो उन्हें निखारने के लिए एक 'लोकल गुरु' से बेहतर कौन हो सकता है जो उनकी भाषा, उनके घरों के माहौल और उनके संघर्ष को दिल से समझ सके कम से कम पूरे 10 के 10 हेड कोच तो इंडिया के होने ही चाहिए 

​तो बात घूम-फिर कर वहीं आती है कि आईपीएल फिलहाल एक बड़े बदलाव के चौराहे पर खड़ा है। खिलाड़ियों की बोली में तो हमारे देसी लड़कों को सम्मान मिलना शुरू हो गया है, लेकिन यह बदलाव तब तक अधूरा है जब तक विदेशी खिलाड़ियों पर अंधा पैसा लुटाना बंद नहीं होगा।

​यह लीग तभी सही मायनों में इंडियन बनेगी जब मैदान के साथ-साथ ड्रेसिंग रूम की पूरी कमान और वो करोड़ों वाला असली सम्मान हमारे अपने भारतीय दिग्गजों को मिलेगा। आखिरकार, नाम में Indian सिर्फ ब्रांडिंग के लिए नहीं बल्कि हमारे हक और गर्व के लिए होना चाहिए।

मेरा तो साफ मानना है कि जब नाम Indian प्रीमियर लीग है, तो हेड कोच, बैटिंग कोच और बॉलिंग कोच की कुर्सी पर भी हमारे अपने भारतीय दिग्गजों का ही हक होना चाहिए। जब हमारे देश के पास क्रिकेट के भगवान सचिन तेंदुलकर, वीरेंद्र सहवाग, युवराज सिंह, सुरेश रैना, अंबाती रायडू और मुरली विजय जैसे महान हीरोज़ मौजूद हैं, तो फिर रणनीति बनाने के लिए हमेशा विदेशी चेहरों की तरफ क्यों ताका जाता है

​रही बात खिलाड़ियों की, तो हमारा विरोध उनके खेलने से बिल्कुल नहीं है वो नियम के मुताबिक 4 खिलाड़ी जरूर खेलें, लेकिन फ्रेंचाइजियों को उन पर अंधा पैसा लुटाने के बजाय एक बजट लिमिट (सीमा) तय करनी चाहिए ताकि दो-चार मैचों के जलवे के लिए करोड़ों रुपये पानी में न जाएं और हमारे अपने देसी टैलेंट को सबसे ज्यादा रिस्पेक्ट मिले। इस मुद्दे पर आपकी क्या राय है? क्या सभी 10 टीमों के कोच 100% भारतीय होने चाहिए? प्लीज, कमेंट बॉक्स में अपनी दिल की बात बताएं और अगर बात पते की लगी हो, तो इसे अपने सभी क्रिकेट प्रेमी दोस्तों तक शेयर करना बिल्कुल मत भूलना

                           ... लेखक नेम शानू धोनी सर फैन बॉय... 


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