R Ashwin On Ravindra Jadeja अश्विन का बड़ा दावा बॉलिंग नहीं अब इस कमाल से मैच जिता रहे जड्डू
अश्विन का साफ कहना है कि 37 साल के रवींद्र जडेजा अब पहले जैसे सिर्फ आक्रामक या मुख्य स्पिनर नहीं रहे। बल्कि सच तो ये है कि वो अब भारतीय टेस्ट टीम के एक बहुत ही मजबूत और भरोसेमंद मिडिल-ऑर्डर बल्लेबाज बन चुके हैं, जो जरूरत पड़ने पर अपनी कसी हुई बॉलिंग से मैच संभालते हैं।
अगर आप पिछले कुछ सालों में टेस्ट मैचों में जड्डू का खेल देखेंगे, तो दिल कहेगा कि अश्विन भाई बिल्कुल सच बोल रहे हैं।
बॉलिंग ऑलराउंडर से प्रॉपर बैटर बनने का खूबसूरत सफर
याद करो जब जडेजा ने टेस्ट क्रिकेट में कदम रखा था। तब उनकी पहचान एक ऐसे बॉलर की थी जो फटाफट ओवर फेंकता था, स्टंप-टू-स्टंप सीधी गेंदें डालता था और बैटर को ज़रा भी सांस लेने का मौका नहीं देता था। लेकिन बंदे ने नेट सेशन में अपने बल्ले पर जितनी मेहनत की है, उसकी जितनी तारीफ की जाए कम है।
अब चाहे भारत में मैच हो या देश के बाहर, जब भी ऊपर के तीन-चार बल्लेबाज जल्दी पैवेलियन लौट जाते हैं, तो क्रीज पर 'सर जडेजा' मूंछों पर ताव देते हुए उतरते हैं। वे सिर्फ क्रीज पर टिकते नहीं हैं, बल्कि निचले क्रम के साथ मिलकर मैच-विनिंग पारियां खेलते हैं। आज के समय में जडेजा सिर्फ बॉल से जादू दिखाने वाले खिलाड़ी नहीं, बल्कि टीम इंडिया के सबसे भरोसेमंद बल्लेबाजों में से एक हैं।
क्या वाकई कमजोर पड़ गई जडेजा की बॉलिंग
अब आपके मन में सवाल आ रहा होगा कि क्या अश्विन ये कहना चाह रहे हैं कि जड्डू की बॉलिंग में अब वो पहली वाली बात नहीं रही तो जवाब है अरे बिल्कुल नहीं मेरे भाई
इसे आप बॉलिंग में गिरावट मत कहिए, ये तो बढ़ती उम्र और तजुर्बे के साथ खेल को समझने की कमाल की काबिलियत है। शुरुआती दिनों में जडेजा अपनी तेजी और आर्म-बॉल से गिल्लियां उखाड़ते थे। अब वे पिच का मिजाज देखकर दिमाग से जाल बुनते हैं। अश्विन के कहने का सीधा मतलब था कि जडेजा अब हर मैच में 5-6 विकेट के पीछे भागने के बजाय एक छोर से कसकर रन रोकते हैं, जिससे दूसरे छोर के गेंदबाज को मदद मिलती है। और जब हाथ में बल्ला आता है, तो वे एक मंझे हुए बल्लेबाज की तरह मैच जिताकर ही दम लेते हैं।
टीम इंडिया के लिए क्यों वरदान है जड्डू का यह नया रूप
टेस्ट क्रिकेट में नंबर 6 या 7 पर एक ऐसा खिलाड़ी होना जो मुश्किल वक्त में 70-80 रन ठोक दे और फिर 20 ओवर की किफायती बॉलिंग भी निकाल दे यह किसी भी कप्तान के लिए किसी खजाने से कम नहीं है।
टीम का गजब संतुलन जडेजा की इस शानदार बैटिंग की वजह से ही टीम मैनेजमेंट बेफिक्र होकर 5 गेंदबाजों के साथ मैदान पर उतर पाता है।
मुश्किल वक्त में सहारा जब-जब भारत का टॉप-ऑर्डर डगमगाया, जडेजा ने ढाल बनकर टीम की डूबती नैया पार लगाई है।
चीते जैसी फिटनेस 37 की उम्र में भी मैदान पर उनकी फुर्ती देखकर लगता है मानो 22-23 साल का कोई नया लड़का दौड़ रहा हो।
ये आलोचना नहीं, एक पुराने दोस्त का प्यार है
सच कहें तो अश्विन का यह बयान किसी तरह की कड़वाहट या आलोचना नहीं है। यह तो एक पुराने दोस्त और जोड़ीदार की तरफ से जडेजा के इस शानदार बदलाव की दिल से की गई तारीफ है। रवींद्र जडेजा ने वक्त के साथ खुद को जैसा ढाला है, वह हर युवा खिलाड़ी के लिए एक सीख है। वे अब सिर्फ नाम के 'सर जडेजा' नहीं हैं, बल्कि भारतीय टेस्ट टीम की असली रीढ़ बन चुके हैं।
दोस्त क्या वाकई टेस्ट मैचों में जडेजा की बल्लेबाजी अब उनकी गेंदबाजी से ज्यादा कमाल दिखा रही है एक वक्त था जब अश्विन और जडेजा की स्पिन जोड़ी मैदान पर राज करती थी और विरोधियों के पसीने छुड़ा देती थी। लेकिन आज जब खेल बदल रहा है, तो आपको क्या लगता है कि टेस्ट में सर जडेजा को अश्विन जैसा दूसरा जोड़ीदार कौन मिल सकता है क्या मानव सुथार या कुलदीप यादव में वो दम दिखता है?
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... लेखक नेम शानू धोनी सर फैन बॉय...
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